बिहार के विश्वविद्यालयों में बदलेगा PG का सिलेबस, 46 पाठ्यक्रमों के लिए बनेगा एक समान ढांचा
बिहार के विश्वविद्यालयों में PG की पढ़ाई के लिए एकसमान पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो रही है. NEP 2020 और UGC के दिशा-निर्देशों के आधार पर 46 स्नातकोत्तर कार्यक्रमों का नया सिलेबस तैयार किया जाएगा, जिसमें शोध, कौशल विकास और विषय चयन के विकल्पों पर खास जोर रहेगा.
BIHAR NEWS: बिहार के विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई को लेकर बड़ा शैक्षणिक बदलाव होने जा रहा है. राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में संचालित PG पाठ्यक्रमों को एक समान स्वरूप देने की तैयारी की गई है. इसके तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए नया पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा.
छह दिनों तक विशेषज्ञ तैयार करेंगे नया पाठ्यक्रम
नए PG पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए बिहार लोक भवन में छह दिवसीय शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इसमें राज्य के अलग-अलग विश्वविद्यालयों से 150 से अधिक शिक्षक और विषय विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे. विशेषज्ञ विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के साथ यह भी तय करेंगे कि विद्यार्थियों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप किस तरह के शैक्षणिक विकल्प दिए जाएं. राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के मुताबिक इस प्रक्रिया में बिहार के विश्वविद्यालयों में चल रहे सभी 46 स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के पाठ्यक्रम तैयार किए जाने हैं.
हर सेमेस्टर में 22 क्रेडिट रखने का प्रस्ताव
प्रस्तावित व्यवस्था में प्रत्येक सेमेस्टर के लिए 22 क्रेडिट का समान ढांचा रखने की योजना है. दो वर्षीय PG के तीसरे और चौथे सेमेस्टर के साथ एक वर्षीय PG के पहले और दूसरे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम को भी नए स्वरूप में तैयार किया जाएगा. नई व्यवस्था में केवल विषय आधारित पढ़ाई तक सीमित रहने के बजाय विद्यार्थियों के कौशल विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा. छात्रों को अपनी रुचि, करियर और भविष्य की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम चुनने के ज्यादा अवसर मिल सकेंगे.
शोध और स्किल डेवलपमेंट पर रहेगा फोकस
PG के तीसरे सेमेस्टर में विद्यार्थियों के लिए विषय से संबंधित वैकल्पिक पाठ्यक्रम, कौशल विकास से जुड़े कोर्स और शोध का विकल्प उपलब्ध कराने की योजना है. चौथे सेमेस्टर में छात्र विशेष विषयों की पढ़ाई के अलावा रिसर्च प्रोजेक्ट या शोध आधारित पाठ्यक्रम का चुनाव कर सकेंगे.
सभी विश्वविद्यालयों में एक जैसा शैक्षणिक ढांचा
इस बदलाव का प्रमुख उद्देश्य बिहार के विश्वविद्यालयों में PG शिक्षा की गुणवत्ता और पाठ्यक्रम में एकरूपता लाना है. नए PG ढांचे को राज्य में लागू चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के साथ भी जोड़ा जाएगा. इससे स्नातक से स्नातकोत्तर स्तर पर जाने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई में बेहतर तालमेल मिल सकेगा.एकसमान पाठ्यक्रम लागू होने के बाद अलग-अलग विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को समान शैक्षणिक संरचना मिलने की उम्मीद है. साथ ही शोध, कौशल विकास और विषय चयन की बढ़ी हुई स्वतंत्रता PG शिक्षा को अधिक रोजगारोन्मुख और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.