पटना (PATNA) : बिहार में करीब एक दशक से लागू पूर्ण शराबबंदी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. NCAER की हालिया स्टडी में राज्य में पूर्ण शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित शराब बिक्री और आबकारी कर व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की गई है. रिपोर्ट में शराबबंदी की प्रभावशीलता, अवैध शराब के कारोबार और सरकार को होने वाले राजस्व नुकसान जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं.
NDA के कुछ बड़े नेताओं के बयान भी चर्चा में
रिपोर्ट सामने आने के बाद NDA के कुछ बड़े नेताओं के बयान भी चर्चा में हैं. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी शराबबंदी की समीक्षा और गुजरात मॉडल जैसे विकल्प पर विचार करने की बात करते रहे हैं. वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी शराबबंदी कानून की समीक्षा की जरूरत बताई है. हालांकि उन्होंने तत्काल शराबबंदी हटाने का समर्थन नहीं किया और इसके लिए पहले व्यापक जन-जागरूकता को जरूरी बताया है.
JDU ने साफ कहा बिहार में शराबबंदी जारी रहेगी
दूसरी ओर JDU ने साफ कहा है कि बिहार में शराबबंदी जारी रहेगी और इसकी समीक्षा का कोई सवाल नहीं है. वहीं बीजेपी का कहना है कि मांझी और चिराग पासवान की पार्टियों के मंत्री अपनी बात कैबिनेट में रख सकते हैं और कैबिनेट का फैसला सभी को मान्य होगा.
पूरे मामले पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा
इस पूरे मामले पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा है. RJD का आरोप है कि ऐसी रिपोर्ट पहले भी सामने आ चुकी है, लेकिन इस बार राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए शराबबंदी खत्म करने का माहौल तैयार किया जा रहा है. विपक्ष ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में सरकार शराबबंदी कानून को लेकर बड़ा फैसला कर सकती है.
आधिकारिक रुख यही है कि बिहार में शराबबंदी जारी रहेगी
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या NCAER की रिपोर्ट और NDA नेताओं के बयानों के जरिए शराबबंदी में बदलाव की राजनीतिक जमीन तैयार की जा रही है या यह केवल एक नई सियासी बहस है? फिलहाल सरकार और JDU का आधिकारिक रुख यही है कि बिहार में शराबबंदी जारी रहेगी.

