नवनिर्वाचित एमएलसी राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी की जाएगी सदस्यता? जन सुराज पार्टी ने सबूत दिखा कह दी बड़ी बात
बिहार विधान परिषद चुनाव में नव निर्वाचित दो निर्दलीय प्रत्याशियों के भाजपा की सदस्यता लेने का मामला अब बिहार की राजनीति में नया मुद्दा बन गया है. इसे लेकर एक तरफ जहां राजद ने कोर्ट तक जाने की बात कह दी है तो अब जन सुराज पार्टी ने भी तीखा हमला किया है.
पटना (PATNA): बिहार विधान परिषद चुनाव में नव निर्वाचित दो निर्दलीय प्रत्याशियों के भाजपा की सदस्यता लेने का मामला अब बिहार की राजनीति में नया मुद्दा बन गया है. इसे लेकर एक तरफ जहां राजद ने कोर्ट तक जाने की बात कह दी है तो अब जन सुराज पार्टी ने भी तीखा हमला किया है. जन सुराज पार्टी ने भी इसे जनादेश की चोरी करार दिया है. मामले में जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव सिंह ने एक प्रेस वार्ता किया और भाजपा पर जोरदार हमला बोला. साथ ही उन्होंने भी कोर्ट जाने की बात कही. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से संविधान और लोकतंत्र के लिए मजाक की तरह है.
जनादेश की चोरी
उन्होंने कहा कि 23 को विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान हुआ, 27 से मतगणना शुरू हुआ और 28 को परिणाम आया जिसमें भाजपा, राजद और निर्दलीय के दो दो उम्मीदवार विजयी हुए तो जन सुराज और जदयू के एक एक उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है. अब शनिवार को दोनों निर्दलीय प्रत्याशी ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है जबकि संविधान के नियमों के अनुसार निर्दलीय उम्मीदवार किसी पार्टी में शामिल नहीं हो सकते हैं. अगर वह किसी भी दल में जाते हैं तो उनकी सदस्यता चली जाएगी.
अगर सदस्यता नहीं ली तो रसीद कहां से आया
जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव सिंह ने कहा कि कल इन लोगों ने पहले सोशल मीडिया पर सदस्यता लेने की बात लिखी फिर बाद में उसे बदल कर समर्थन देने की बात कही. उन्होंने बंशीधर ब्रजवासी की एक फोटो दिखाते हुए कहा कि अगर आपने सदस्यता नहीं ग्रहण की है तो फिर आपके हाथ में भाजपा की सदस्यता रसीद कैसे आ गए. राहुल राज ने सदस्यता लेने को लेकर अपना बयान भी मीडिया में दिया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अब तक दर्जनों बार इस संबंध में फैसला दिया है.
हम जाएंगे कोर्ट
कुमार सौरव सिंह ने कहा कि इस मामले में हम सबसे पहले विधान परिषद के सभापति को जानकारी देंगे. अगर नियम के अनुसार वह तीन महीने के अंदर अपना फैसला नहीं देते हैं तो हम हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे. विधान परिषद के सभापति और कोर्ट तक जाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उन लोगों की सदस्यता जाये.