बिहार का बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पहुंचा संसद: सांसद सुधाकर सिंह ने आईपीएस अधिकारी  कुंदन कृष्णन के नोटिस पर क्यों उठाये सवाल

बिहार के बहुचर्चित भारत भूषण तिवारी की कथित फर्जी मुठभेड़ का मामला अब संसद के गलियारे तक पहुंच गया है.राजद सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए मानहानि के कानूनी नोटिस को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की है.

बिहार का बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पहुंचा संसद: सांसद सुधाकर सिंह ने आईपीएस अधिकारी  कुंदन कृष्णन के नोटिस पर क्यों उठाये सवाल

टीएनपी डेस्क: बिहार के बहुचर्चित भारत भूषण तिवारी की कथित फर्जी  मुठभेड़ का मामला अब संसद के गलियारे तक पहुंच गया है.  राजद  सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए मानहानि के कानूनी नोटिस को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप  की मांग की है.  सांसद ने इस मामले में जांच कराने  और जांच में पर्याप्त आधार मिलने पर इसे संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का अनुरोध किया है. सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कह है कि ---

सांसद ने मानहानि के नोटिस पर उठाये हैं सवाल 

मैं आपके संज्ञान में एक गंभीर मामला लाना चाहता हूँ, जो निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्रता, कार्यपालिका की जवाबदेही और संसद की गरिमा से संबंधित है.बिहार के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी श्री कुंदन कृष्णन ने अपने निजी अधिवक्ता के माध्यम से मुझे कानूनी नोटिस भेजकर सार्वजनिक क्षमायाचना की माँग की है तथा पाँच करोड़ रुपये के मानहानि वाद और आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है.  इस नोटिस का आधार भोजपुर जिले के बिलौटी गाँव में भारत भूषण तिवारी की संदिग्ध मृत्यु और कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ की घटना पर मेरे द्वारा जनहित में उठाए गए प्रश्न है.  नागरिकों के जीवन, मौलिक अधिकारों, पुलिस कार्रवाई और संभावित सत्ता-दुरुपयोग के विषय में प्रश्न उठाना, पीड़ित परिवार की बात सामने रखना तथा निष्पक्ष जाँच की माँग करना मेरे प्रतिनिधिक दायित्व का अभिन्न हिस्सा है. 

क्या कह सांसद ने की है जांच की मांग 

संविधान का अनुच्छेद 105 संसद और उसकी समितियों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा वहाँ कही गई बातों के संबंध में न्यायिक कार्यवाही से संरक्षण प्रदान करता है.  मैं इस प्रावधान को सदन के बाहर दिए गए प्रत्येक वक्तव्य के लिए असीमित उन्मुक्ति के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहा हूँ, मेरा मानना है कि आईपीएस अधिकारी श्री कुंदन कृष्णन द्वारा भेजे गए इस नोटिस का उद्देश्य मुझे संबंधित विषय संसद में उठाने और अपने संसदीय दायित्वों का स्वतंत्रतापूर्वक निर्वहन करने से रोकना है, इसलिए इसकी विस्तृत जाँच आवश्यक है.  लोकसभा के किसी सदस्य के संसदीय आचरण को प्रभावित करने के लिए दबाव या भय का प्रयोग सदन की गरिमा और विशेषाधिकारों से संबंधित गंभीर प्रश्न खड़ा करता है. 

पूछा है  कुन्दन कृष्णन ने किस हैसियत से यह नोटिस भेजा है 

अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 17 के अंतर्गत आलोचना का विषय बने शासकीय कृत्य के समर्थन में न्यायालय का सहारा लेने के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृति का प्रावधान हैं.  इसलिए यह स्पष्ट कराया जाना आवश्यक है कि श्री कुन्दन कृष्णन ने किस हैसियत से यह नोटिस भेजा, क्या बिहार या केंद्र सरकार से स्वीकृति माँगी गई और यदि हाँ, तो उसका निर्णय तथा संबंधित अभिलेख क्या हैं.  इस नोटिस का एक अन्य गंभीर पहलू निजी विधि फर्म द्वारा बिहार सरकार की ओर से बोलने का आभास उत्पन्न करना है. अधिकारी की ओर से भेजे गए नोटिस में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और सरकारी कार्रवाई का बचाव जिस प्रकार किया गया है, उससे यह प्रश्न उठता है कि संबंधित विधि फर्म केवल उस अधिकारी का व्यक्तिगत प्रतिनिधित्व कर रही है अथवा बिहार सरकार का अधिकृत पक्ष भी प्रस्तुत कर रही है.

क्यों की है बिहार सरकार से स्पस्टीकरण मंगाने की मांग 

संविधान के अनुच्छेद 165 के अंतर्गत राज्य के महाधिवक्ता का संवैधानिक पद स्थापित है. राज्य सरकार की ओर से विधिक प्रतिनिधित्व महाधिवक्ता, सरकारी विधि अधिकारियों अथवा विधिवत नियुक्त और अधिकृत अधिवक्ताओं के माध्यम से किया जा सकता है. किसी अधिकारी का निजी अधिवक्ता मात्र उस अधिकारी से निर्देश प्राप्त करके बिहार सरकार का अधिकृत प्रतिनिधि नहीं बन जाता.एक आईपीएस अधिकारी स्वयं बिहार सरकार नहीं है. उसकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, पुलिस विभाग की संस्थागत भूमिका, उसके पद से जुड़े दायित्व और राज्य सरकार का अधिकृत पक्ष अलग-अलग विषय हैं. यदि संबंधित निजी विधि फर्म को बिहार सरकार का पक्ष रखने के लिए अधिकृत किया गया है, तो उस प्राधिकरण, नियुक्ति और निर्देशों का आधार स्पष्ट किया जाए. यदि ऐसा कोई प्राधिकरण नहीं है और फिर भी सरकार के अधिकृत प्रतिनिधित्व का दावा किया गया है, तो लोकसभा सचिवालय के माध्यम से बिहार सरकार से स्पष्टीकरण माँगा जाए तथा सक्षम क़ानूनी प्राधिकार द्वारा संबंधित विधि फर्म से स्पष्टीकरण माँगकर उस पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाये.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी चिंता यह है कि यदि वरिष्ठ प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी अपने शासकीय कार्यों की समीक्षा करने वाले जनप्रतिनिधियों को भारी आर्थिक दावों और आपराधिक कार्रवाई की चेतावनियों से भयभीत करने लगें, तो इससे लोकतांत्रिक निगरानी और सार्वजनिक विमर्श पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. 

अतः आपसे सादर अनुरोध है कि:

1. इस प्रकरण का संज्ञान लेकर जाँच कराया जाए कि क्या श्री कुंदन कृष्णन का उक्त नोटिस मेरे संसदीय दायित्वों के निर्वहन में बाधा डालने अथवा मेरे संसदीय आचरण को प्रभावित करने का प्रयास है; प्रथमदृष्टया आधार पाए जाने पर इसे विशेषाधिकार समिति को संदर्भित किया जाए.2. लोकसभा सचिवालय के माध्यम से बिहार सरकार से विवरण माँगा जाए कि पुलिस अधिकारी श्री कुंदन कृष्णन ने किन प्रावधानों और किस सरकारी अनुमति के आधार पर मुझे नोटिस भेजा है. लागू सेवा नियमों के अंतर्गत स्वीकृति की स्थिति तथा संबंधित पत्राचार और अभिलेख भी उपलब्ध कराए जाएँ.3.यह स्पष्ट कराया जाए कि संबंधित निजी विधि फर्म को बिहार सरकार का पक्ष प्रस्तुत करने का कोई अधिकार दिया गया था या नहीं; यदि दिया गया था, तो उसका आदेश और दायरा उपलब्ध कराया जाए.
4. संबंधित सक्षम प्राधिकारियों से न्यायिक जाँच की वर्तमान स्थिति तथा उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने के संबंध में जानकारी माँगी जाए, ताकि अपुष्ट दावों के स्थान पर तथ्य सामने आ सकें.5. सदस्यों के संसदीय कर्तव्यों से संबंधित मामलों में कार्यपालिका द्वारा दबाव या प्रतिशोध की किसी भी संभावित कार्रवाई के विरुद्ध सदन की गरिमा और सदस्यों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएँ.मैं आपके समक्ष यह विषय संसद की गरिमा और निर्वाचित प्रतिनिधियों की स्वतंत्रता के संरक्षक के रूप में रख रहा हूँ. मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उचित कार्रवाई करेंगे.

सादर,

सुधाकर सिंह