तेजस्वी का सरकार पर डबल अटैक, पुलिस ज्यादती और आरक्षण के मुद्दे तक उठाए बड़े सवाल
पटना में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार में कथित पुलिस अत्याचार और आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार तथा एनडीए नेताओं को घेरा. इस दौरान वैशाली के यूट्यूबर कुंदन कुमार ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए.
पटना (PATNA): पटना में बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दो प्रमुख मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरा. उनके साथ वैशाली जिले के यूट्यूबर कुंदन कुमार भी मौजूद रहे. तेजस्वी ने बिहार में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अलग-अलग जिलों से पुलिस ज्यादती, फर्जी मुकदमे और कथित फर्जी एनकाउंटर जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं.
कुंदन कुमार ने दावा किया कि 29 अगस्त 2026 की देर रात पुलिस उनके घर पहुंची और जबरन अंदर घुसकर उन्हें हिरासत में लिया. उनका आरोप है कि इस दौरान उनके तथा परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट हुई. कुंदन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने शरीर पर कथित चोटों के निशान भी दिखाए. कुंदन ने आरोप लगाया कि स्थानीय सड़क की समस्या को अपने यूट्यूब चैनल के जरिए उठाने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई हुई. उन्होंने इस मामले में स्थानीय विधायक और बिहार सरकार के मंत्री लखेंद्र पासवान पर भी आरोप लगाए. इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने नहीं आया.
तेजस्वी बोले-दोषियों पर हो कार्रवाई
तेजस्वी यादव ने कहा कि मामले में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि इस विषय पर स्थानीय एसपी से भी बातचीत की गई है. तेजस्वी ने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आरजेडी आगे की रणनीति बनाएगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन का रास्ता अपनाएगी. उन्होंने पुलिस से अपनी कार्यशैली और व्यवहार सुधारने की अपील करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था में जनता का भरोसा कायम रहना जरूरी है.
आरक्षण को लेकरएनडीए नेताओं पर निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दूसरे हिस्से में तेजस्वी यादव ने आरक्षण का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि बिहार में महागठबंधन सरकार के दौरान जाति आधारित गणना के आंकड़ों के बाद आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया गया था. उन्होंने सवाल किया कि बढ़े हुए आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है. तेजस्वी ने चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा समेत एनडीए से जुड़े नेताओं पर इस मुद्दे पर पर्याप्त आवाज नहीं उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों, विश्वविद्यालयों में कुलपतियों और केंद्र सरकार के सचिव स्तर के पदों पर एससी-एसटी समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाए. तेजस्वी यादव ने कहा कि जाति आधारित गणना का वास्तविक लाभ तभी होगा जब आबादी और सामाजिक स्थिति से जुड़े आंकड़ों के आधार पर आरक्षण तथा प्रतिनिधित्व के सवाल पर ठोस कदम उठाए जाएं.