गाद प्रबंधन नीति बिहार सरकार की बड़ी सफलता, नदियों का होगा कायाकल्प, विजय चौधरी ने गिनाए फायदे
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में नई दिल्ली में नदियों से गाद निकाले जाने की योजना को लेकर समझौता ज्ञापन तथा बुधवार को सीएम के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात को लेकर बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने एक प्रेस वार्ता की
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में नई दिल्ली में नदियों से गाद निकाले जाने की योजना को लेकर समझौता ज्ञापन तथा बुधवार को सीएम के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात को लेकर बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने एक प्रेस वार्ता की. इस दौरान उन्होंने गाद प्रबंधन नीति तथा समझौता ज्ञापन को बिहार सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए राज्य के लोगों के फायदे भी बताए.
सबसे पहले गाद को लेकर हमने उठाई थी आवाज
उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा कि देश भर में सबसे पहले बिहार सरकार और जल संसाधन विभाग में गाद की बात और उससे होने वाली परेशानी का मामला उठाते हुए केंद्र सरकार से पहल करने की मांग की थी. इसके बाद जल संसाधन विभाग और तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई स्तर पर इस मुद्दे को उठाया था तथा हमलोगों ने तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री को बुला कर गाद की वजह से गंगा की बुरी स्थिति को भी दिखाया था. हमारी पहल पर अब बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार में गाद प्रबंधन नीति बनी तथा अब उनकी ही अगुवाई में केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ समझौता भी किया गया है जिससे बिहार को कई लाभ होंगे.
गाद की वजह से नदियों का बदल गया है स्वरूप
उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि गंगा समेत अन्य कई नदियां गाद की वजह से मृतप्राय की स्थिति में जा रही हैं. अगर नदियों से गाद निकाल ली जाती है तो नदियों का पुनर्स्थापन हो जाएगा जिससे बाढ़ की स्थिति में भी बिहार को काफी लाभ होगा और उससे बचाव होगा. विजय चौधरी ने कहा कि नदियों से गाद हमारे अनुसार ही निकाली जाएंगी और उसका कई जगहों पर खास कर सड़क निमार्ण में उपयोग किया जाएगा. इससे भी किसानों का फायदा होगा कि वर्तमान में सड़क निर्माण या मिट्टी भराई वाली जगहों पर खेतों से मिट्टी काटी जाती है जिससे उर्वरक मिट्टी बर्बाद होती है. अगर सड़क निर्माण में गाद का उपयोग किया जाता है तो वह सबसे अच्छा होगा और सड़को को भी मजबूती मिलेगी.
गाद प्रबंधन नीति से बचेगी नदियों की जान
उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बिहार में गंगा नदी करीब साढ़े चार सौ किलोमीटर तक बहती है. अगर इससे गाद निकाल दी जाए तो उसका काफी फायदा किसानों को मिलेगा. इसके साथ ही कई अन्य नदियां हैं जो गाद की वजह से मृतप्राय हो चुकी हैं. उन नदियों से अगर उसे निकाल दिया जाए तो नदियों में फिर से जान आ जाएगी. मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि हमलोग लंबे समय से इस दिशा में प्रयासरत थे और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सार्थक पहल की है तथा हमारी कोशिश सफल हुई है.
सभी पार्टी चुनाव बाद करती है समीक्षा
उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा कि एमएलसी चुनाव में मिली हार की समीक्षा की जाएगी. यह हर चुनाव के बाद सभी पार्टियां करती हैं और यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. इस दौरान उन्होंने विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर कहा कि हताशा और निराशा में वह लोग संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं. वह लोग तो लोकतंत्र पर ही हमला कर रहे हैं जिसे बचाने के लोकतंत्र बचाओ अभियान चलाया जा रहा है. किसी भी देश का संविधान अगर सुरक्षित और मजबूत रहे तभी लोकतंत्र मजबूत रहता है. भारत का चुनाव आयोग पूरे विश्व में निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए प्रसिद्ध है. दूसरे देशों के प्रतिनिधि यहां कर चुनाव प्रक्रिया देखते और चुनाव आयोग की कार्यशैली का अध्ययन करते हैं. भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और आजादी के बाद से अब तक चुनाव आयोग ने जिस कुशलता से चुनावों का संचालन किया है वह काबिलेतारीफ है. तो विपक्ष हताशा में इस तरह से उंगली उठा रहा हैं.
विपक्ष पर भी बोला जोरदार हमला
उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा कि एसआईआर पर विपक्ष बिना तथ्य के हंगामा कर रहा है. मैंने तो पिछले चुनाव में भी चुनौती दी थी कि किसी एक व्यक्ति का नाम बता दीजिए जिसका गलत तरीके से नाम कटा हो लेकिन अब तक कुछ नहीं दिया गया. लोकतंत्र के संविधान में लोगों को यही आजादी है कि झूठ भी बोलें तो आप रोक नहीं सकते हैं. जिस संवैधानिक संस्था की प्रशंसा पूरे विश्व में हो रही है उसे ही अगर कोई बदनाम करने की कोशिश करता है तो उसे फिर लोकतंत्र पर हमला ही कहेंगे. अगर लोकतंत्र पर कोई प्रहार करता है तो सभी प्रजातांत्रिक संस्थाओं का उसे बचाना जिम्मेदारी होती है. आजतक किसी ने न्यायपालिका पर दबाव नहीं बनाया लेकिन विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट पर भी दबाव बना रहे हैं. जो लोग किस सदन के दशकों से सदस्य हैं वही लोग मॉक पार्लियामेंट कर रहे हैं.