चीनी के बढ़ते दाम पर बिहार में सियासी बहस, मंत्रियों के तर्क ने खड़े किए सवाल,पढ़ें पूरी खबर
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच बिहार के मंत्री श्रवण कुमार के डायबिटीज वाले तर्क ने नई बहस छेड़ दी है. महंगाई, किसानों की आय और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बोझ को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
पटना (PATNA): देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच बिहार सरकार के मंत्रियों के बयान नई राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है. एक तरफ बाजार में चीनी महंगी होने से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ बिहार के मंत्री श्रवण कुमार ने कीमतों में बढ़ोतरी के असर को लेकर ऐसा तर्क दिया, जिसकी चर्चा तेज हो गई है. हाल के हफ्तों में देश में चीनी के भाव में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है.
श्रवण कुमार ने दिया डायबिटीज का तर्क
चीनी की महंगाई को लेकर पूछे गए सवाल पर बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि आजकल लोग पहले की तुलना में कम चीनी और मिठाई खाते हैं. इसके पीछे उन्होंने डायबिटीज का हवाला दिया. उनका कहना था कि बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, इसलिए चीनी की कीमत बढ़ने से बहुत ज्यादा फर्क पड़ने जैसी स्थिति नहीं है. उनका यह बयान सामने आने के बाद चर्चा का विषय बन गया.
सवाल यह है कि किसी खाद्य वस्तु की कीमत में वृद्धि का आकलन केवल उसके स्वास्थ्य प्रभाव या खपत के आधार पर किया जा सकता है या नहीं. चीनी सिर्फ घरों में चाय या मिठाई के लिए इस्तेमाल होने वाली वस्तु नहीं है, बल्कि कई खाद्य उत्पादों की लागत से भी जुड़ी हुई है.
किसानों के फायदे का तर्क
चीनी की कीमतों को लेकर दूसरी तरफ किसानों की आय का सवाल भी महत्वपूर्ण है. गन्ना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलना जरूरी है. बिहार में गन्ने की खेती और चीनी उद्योग से बड़ी संख्या में किसानों का हित जुड़ा हुआ है. राज्य सरकार भी हाल में गन्ना किसानों की खाद और दूसरी समस्याओं को लेकर सक्रिय रही है. लेकिन उपभोक्ता के नजरिए से तस्वीर अलग है. बिहार के कई बाजारों में भी चीनी के खुदरा दाम बढ़ने की खबरें हैं. सुपौल और मुजफ्फरपुर में चीनी की कीमत 52 से 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है.
किसान और उपभोक्ता के बीच संतुलन का सवाल
किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य मिले और उनकी आमदनी बढ़े, यह कृषि अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है. साथ ही सरकार के सामने यह जिम्मेदारी भी है कि जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें आम उपभोक्ता की पहुंच से बाहर न जाएं. ऐसे में चीनी की महंगाई पर मंत्रियों के बयानों से बड़ा सवाल यही निकलता है-क्या किसान को बेहतर कीमत दिलाने और उपभोक्ता को महंगाई से बचाने के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है? बढ़ती कीमतों के दौर में जनता सरकार से इसी संतुलन और ठोस समाधान की उम्मीद करती है.