अब नहीं जाएगी राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी की सदन की सदस्यता, विपक्ष की शिकायत खारिज, इस दिन ले सकते हैं शपथ
जन सुराज पार्टी तथा इंडिया गठबंधन खास कर राजद ने जोर शोर से उठाया था विधान परिषद के सभापति रामवचन राय से मुलाकात कर कार्रवाई की भी मांग की थी लेकिन अब यह मामला ठंडा पड़ गया है.
पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव का परिणाम आने के बाद एक राजनीतिक विवाद ने काफी तेजी से तूल लिया था. इस मुद्दे को जन सुराज पार्टी- इंडिया गठबंधन खास कर राजद ने जोर शोर से उठाया था विधान परिषद के सभापति रामवचन राय से मुलाकात कर कार्रवाई की भी मांग की थी लेकिन अब यह मामला ठंडा पड़ गया है. अब नवनिर्वाचित विधान पार्षदों के शपथ ग्रहण की तैयारी शुरू कर दी गई है. दरअसल एमएलसी चुनाव के बाद दो निर्दलीय पार्षदों ने कथित रूप से भाजपा की सदस्यता ले ली, हालांकि बाद में उन्होंने सिर्फ समर्थन देने की बात कही लेकिन विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया.
निर्दलीय पार्षदों को सदस्यता के लिए अयोग्य होने की अर्जी खारिज
विपक्ष में जन सुराज पार्टी तथा राजद के प्रतिनिधिमंडल ने विधान परिषद के सभापति रामवचन राय से मुलाकात कर दोनों पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी. मामले की जांच और समीक्षा के बाद विपक्ष की मांग खारिज कर दी गई. विपक्ष ने आरोप लगाया था कि निर्दलीय जन प्रतिनिधि किसी भी दल का समर्थन कर सकते हैं लेकिन सदस्यता नहीं ले सकते. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सारण शिक्षक निर्वाचन सीट के निर्दलीय नवनिर्वाचित पार्षद राहुल राज तथा दरभंगा स्नातक सीट के नवनिर्वाचित एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी ने कथित रूप से भाजपा की सदस्यता ली है जिसके आधार पर उनकी सदस्यता रद्द कर देनी चाहिए. हालांकि दोनों पार्षदों ने सिर्फ़ समर्थन देने की बात कही थी.
क्यों नहीं हो सकती है कार्रवाई
विधान परिषद के सभापति ने जन सुराज पार्टी तथा राजद की शिकायत को तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया है. मामले में अब सामने आया है कि जब दोनों नवनिर्वाचित पार्षदों ने शपथ ही नहीं ली तो फिर उनके विरुद्ध दल बदल कानून के तहत कार्रवाई कैसे हो सकती है और उन्हें सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य कैसे घोषित किया जा सकता है. बता दें कि भारत के संविधान के अनुसार कोई भी जनप्रतिनिधि की सदस्यता निर्वाचित होने के बाद शपथ ग्रहण के बाद से मान्य होती है.
18 को हो सकता है शपथग्रहण
विदित हो कि विधान परिषद के 8 सदस्यों की सदस्यता 16 नवंबर को समाप्त हो रही है. इस वजह से सभी नव निर्वाचित सदस्यों का शपथग्रहण 18 नवंबर को हो सकता है. इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है. वहीं दोनों निर्दलीय पार्षदों की सदस्यता पर से फिलहाल खतरा भी टल गया है. बता दें कि बीते 23 अक्टूबर को 4 शिक्षक निर्वाचन और 4 स्नातक निर्वाचन सीट पर चुनाव के लिए मतदान हुआ और 27 अक्टूबर से मतगणना शुरू हुई थी. चुनाव में भाजपा तथा राजद के दो दो प्रत्याशी, जदयू, जन सुराज पार्टी के एक एक प्रत्याशी तथा दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी.