जमुई एनकाउंटर पर गरमाई सियासत, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने तेजस्वी यादव पर साधा निशाना

जमुई छेड़छाड़ मामले के मुख्य आरोपी नंदन यादव के पुलिस एनकाउंटर में घायल होने के बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए “सम्राट का सुशासन” वाली टिप्पणी की.

जमुई एनकाउंटर पर गरमाई सियासत, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने तेजस्वी यादव पर साधा निशाना

पटना (PATNA): बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित छेड़छाड़ और बदसलूकी के मामले में मुख्य आरोपी नंदन यादव के पुलिस एनकाउंटर में घायल होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक जीतन राम मांझी ने इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है.

नंदन यादव के पैर में लगी गोली

जमुई में छात्रा और उसके साथ मौजूद युवक के साथ कथित बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की थी. मुख्य आरोपी के रूप में नंदन यादव की पहचान की गई. पुलिस कार्रवाई के दौरान नंदन यादव के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी पुलिस कार्रवाई जारी है. घटना का वीडियो सामने आने के बाद महिला सुरक्षा और बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई.

मांझी ने तेजस्वी यादव पर किया कटाक्ष

जमुई एनकाउंटर के बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया के जरिए तेजस्वी यादव को घेरा. मांझी ने अपने पोस्ट में दावा किया कि जमुई की घटना का वीडियो बनाकर सरकार को बदनाम करने की कोशिश की गई. उन्होंने तेजस्वी यादव के यादव समुदाय से जुड़े पूर्व बयानों का संदर्भ देते हुए उन पर राजनीतिक कटाक्ष किया. मांझी ने तंज कसते हुए लिखा कि अब तेजस्वी यादव यह कह सकते हैं कि “सम्राट चौधरी ने मेरे भाई को ठोकवा दिया.” उन्होंने आगे तेजस्वी यादव से अपने “भाइयों” को सचेत करने की बात कही और राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर “सम्राट का सुशासन” वाली टिप्पणी की.

तेजस्वी पहले उठा चुके हैं कानून-व्यवस्था पर सवाल

जमुई की घटना सामने आने के बाद तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे. उन्होंने बिहार में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सरकार को घेरा था. अब आरोपी के पुलिस एनकाउंटर में घायल होने और मांझी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा भी बन गया है.