पटना (PATNA) : बिहार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही पत्रकारों के बहिष्कार का मुद्दा सदन में जोर-शोर से उठा. विपक्षी दलों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार और विधानसभा प्रशासन पर सवाल खड़े किए. विपक्ष का कहना था कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और उनके साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है.
सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करने पर मजबूर होगा
सदन के भीतर विपक्ष के नेताओं ने कहा कि आज पत्रकारों ने बहिष्कार किया है, जो एक गंभीर स्थिति है. उन्होंने मांग की कि विधानसभा अध्यक्ष तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करें और जल्द से जल्द समाधान निकालें. विपक्षी सदस्यों ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता. यदि मामले का जल्द समाधान नहीं हुआ तो पूरा विपक्ष सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करने पर मजबूर होगा.
सभी सदस्यों को शांत रहने की अपील
विपक्ष के हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों को शांत रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी उन्हें है और इस संबंध में पहले भी बातचीत हो चुकी है. अध्यक्ष ने सदन को भरोसा दिलाया कि वह स्वयं इस मामले की निगरानी कर रहे हैं और आज ही इसका समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा.
अध्यक्ष के आश्वासन के बाद कुछ देर तक सदन में माहौल शांत हुआ, लेकिन विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर अपनी नजर बनाए रखेगा. विपक्ष का कहना था कि पत्रकारों के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है.
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय
पत्रकारों के बहिष्कार का मामला राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विधानसभा अध्यक्ष इस मामले का क्या समाधान निकालते हैं और पत्रकारों तथा विधानसभा प्रशासन के बीच बना विवाद किस तरह समाप्त होता है.
यह मुद्दा सिर्फ पत्रकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की भूमिका से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है.

