पटना (PATNA): बिहार सरकार ने राज्य में बैंकिंग व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और असरदायक बनाने के लिए सख्त रुख अपनाया है. खराब प्रदर्शन करने वाले बैक की सरकारी डिपॉजिट रोकने की चेतवानी दी गई है. सूबे के उप मुख्यमंत्री-सह-वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसाओं को मंजूरी दे दी है. विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बैंकिंग व्यवस्था में सुधार के लिए पांच महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं. वित्त विभाग ने साफ कहा है कि खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों की लगातार निगरानी की जाएगी और यदि अगले छह महीनों में उनके कामकाज में सुधार नहीं दिखा तो उनके सरकारी डिपॉजिट पर रोक लगा दी जाएगी.
इसके साथ ही समिति ने राज्य के साख-जमा अनुपात (CD Ratio) को बेहतर बनाने के लिए वार्षिक साख योजना (ACP) का लक्ष्य बढ़ाने की सिफारिश की है. समिति का मानना है कि वित्तीय वर्ष के संभावित डिपॉजिट का कम से कम 80 प्रतिशत ऋण लक्ष्य निर्धारित किया जाना चाहिए. नाबार्ड ने इसके लिए 3.55 लाख करोड़ रुपये का संभावित ऋण योजना (PLP) तैयार किया है, जिसके आधार पर नया ACP तय करने का सुझाव दिया गया है. समिति ने यह भी पाया कि एसबीआई और पीएनबी जैसे बड़े बैंकों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर है, जबकि कई छोटे बैंक बेहतर कार्य कर रहे हैं. ऐसे में बड़े बैंकों को अधिक ऋण लक्ष्य देने की सिफारिश की गई है ताकि राज्य का CD Ratio बढ़ सके.
बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और अन्य सरकारी ऋण योजनाओं को जनसमर्थ पोर्टल से जोड़ने पर भी जोर दिया गया. समिति का मानना है कि इस पोर्टल के जरिए आवेदन प्रक्रिया आसान होगी और ऋण वितरण में पारदर्शिता आएगी. पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों के माध्यम से किसानों, स्वयं सहायता समूहों और जीविका दीदियों को जनसमर्थ पोर्टल से जोड़ने का सुझाव भी दिया गया है. साथ ही राज्य सरकार ने 15 बैंकों को निगरानी सूची में रखने की बात कही है, जिनमें UCO Bank, Union Bank, Central Bank, PNB, SBI, Bank of India, IDBI Bank और अन्य बैंक शामिल हैं. यदि इन बैंकों का प्रदर्शन तय मानकों के अनुरूप नहीं सुधरता है तो उनके सरकारी डिपॉजिट पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है.
गौरतलब है कि बिहार सरकार ने बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने और वित्तीय लक्ष्यों की समय पर प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था. यह समिति नियमित रूप से बैंकों के प्रदर्शन, ACP लक्ष्यों और CD Ratio की समीक्षा करेगी तथा आवश्यक सुधारात्मक कदमों के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगी. सरकार का उद्देश्य राज्य में ऋण वितरण बढ़ाना, बैंकिंग सेवाओं को बेहतर बनाना और आर्थिक विकास को गति देना है.

