लोक आस्था के महापर्व छठ के गीतों पर झूमीं छात्राएं, पारंपरिक वेशभूषा में दिखाई मनमोहक झांकी
छठ महापर्व की रौनक अब स्कूलों में भी देखने को मिल रही है. बिहार के मोतिहारी जिले के हरसिद्धि प्रखंड स्थित सोनबरसा पंचायत के मध्य विद्यालय में छात्राओं ने छठ पूजा के मौके पर खास कार्यक्रम प्रस्तुत किया. पारंपरिक कपड़ों में सजी छात्राओं ने छठ महापर्व से जुड़ी झांकियां दिखाईं और गीतों के जरिए इसकी परंपराओं को समझाया.
मोतिहारी (MOTIHARI): छठ महापर्व आने में बस कुछ ही दिन बाकी है. ऐसे में कई लोगों ने तैयारियां करनी शुरू करदी है. ऐसे में अब छठ महापर्व की रौनक अब स्कूलों में भी देखने को मिल रही है. बिहार के मोतिहारी जिले के हरसिद्धि प्रखंड स्थित सोनबरसा पंचायत के मध्य विद्यालय में छात्राओं ने छठ पूजा के मौके पर खास कार्यक्रम प्रस्तुत किया. पारंपरिक कपड़ों में सजी छात्राओं ने छठ महापर्व से जुड़ी झांकियां दिखाईं और गीतों के जरिए इसकी परंपराओं को समझाया. उनकी प्रस्तुति ने स्कूल में मौजूद लोगों का मन मोह लिया. पूरे विद्यालय परिसर में छठ गीतों की गूंज सुनाई दी और माहौल भक्तिमय हो गया.
झांकी में दिखाई छठ पूजा की परंपराएं
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने छठ पूजा की अलग-अलग परंपराओं को अपनी प्रस्तुति में शामिल किया. किसी ने छठ घाट पर पूजा-अर्चना करते व्रतियों की झलक दिखाई, तो किसी ने सूप में फल, नारियल और पूजा की दूसरी सामग्री सजाकर सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा प्रस्तुत की. छात्राओं ने पारंपरिक छठ गीत ‘केरवा जे फरेला घवद से, ओपर पर सुगा मेड़राय’ भी गाया. गीत और झांकियों के जरिए उन्होंने बताया कि छठ पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज को जोड़ने का भी काम करता है.

बच्चों को बताया छठ का महत्व
इस मौके पर शिक्षकों ने विद्यार्थियों को छठ महापर्व के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व के बारे में बताया. प्रधानाध्यापक प्रमोद महतो ने कहा कि छठ सूर्योपासना के साथ प्रकृति के प्रति आभार जताने का पर्व है. यह हमें स्वच्छता, संयम और अनुशासन का संदेश भी देता है. उन्होंने कहा कि स्कूल में इस तरह के आयोजन होने से बच्चों को अपनी लोक संस्कृति और पुरानी परंपराओं को करीब से जानने का मौका मिलता है. साथ ही नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलती है.