बिहार में दौड़ेंगे 5 नए एक्सप्रेसवे, यूपी से नेपाल और बंगाल तक आसान होगा सफर, जानिए पूरा रूट

बिहार में 5 बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट से सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. बक्सर-भागलपुर से लेकर गोरखपुर-सिलीगुड़ी तक इन कॉरिडोर के जरिए यूपी, नेपाल, झारखंड और पश्चिम बंगाल से संपर्क बेहतर होगा.

बिहार में दौड़ेंगे 5 नए एक्सप्रेसवे, यूपी से नेपाल और बंगाल तक आसान होगा सफर, जानिए पूरा रूट

पटना (PATNA): बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर काम और योजना चल रही है. इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य के अलग-अलग जिलों के बीच सफर आसान होने के साथ उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल सीमा तक सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है. इनमें बक्सर-भागलपुर, आमस-दरभंगा, पटना-पूर्णिया, रक्सौल-हल्दिया और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे प्रमुख हैं. बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे करीब 336 किलोमीटर लंबा 6 लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रस्तावित है, जो बक्सर से भागलपुर तक दक्षिण बिहार के कई जिलों को जोड़ेगा. इसके रास्ते में सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल जैसी नदियों पर पुल और जरूरत के मुताबिक एलिवेटेड स्ट्रक्चर बनाए जाने की योजना है. बक्सर में इसका संपर्क उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से होने की बात कही गई है.

आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे भी बिहार के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है. करीब 189 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का लगभग 170 किलोमीटर हिस्सा बिहार में प्रस्तावित है. यह औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा को जोड़ेगा. इसके जरिए गया-दरभंगा और पटना-दरभंगा के बीच यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है. वहीं पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे करीब 245 से 250 किलोमीटर लंबा 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा. प्रस्तावित कॉरिडोर दिघवारा से डगरूआ तक जाएगा. इसमें 140 छोटे पुल, 21 हाई लेवल ब्रिज, 11 रेलवे ओवरब्रिज, 21 इंटरचेंज और 322 अंडरपास बनाए जाने की योजना है. पूर्णिया एयरपोर्ट को भी इससे जोड़ने का प्रस्ताव है.

नेपाल सीमा के रक्सौल से पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह तक करीब 585 से 600 किलोमीटर लंबा रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है. इसका बड़ा हिस्सा बिहार में होगा और यह माल ढुलाई के लिए अहम कॉरिडोर बन सकता है. वहीं करीब 37,465 करोड़ रुपये की लागत वाला गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे बिहार में लगभग 416 किलोमीटर लंबा होगा. यह पश्चिम चंपारण से किशनगंज तक कई जिलों को जोड़ेगा. इन एक्सप्रेसवे के जरिए लंबी दूरी के सफर का समय घटाने के साथ व्यापार, माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.