बिहार में खनन प्रभावित इलाकों के विकास को मिलेगी रफ्तार, नई DMF नियमावली को मंजूरी

बिहार सरकार ने जिला खनिज फाउंडेशन (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी है. इससे खनन प्रभावित जिलों में बुनियादी सुविधाओं, रोजगार और पुनर्विकास से जुड़ी योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा.

बिहार में खनन प्रभावित इलाकों के विकास को मिलेगी रफ्तार, नई DMF नियमावली को मंजूरी

पटना (PATNA):  बिहार सरकार ने खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण के कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी है. नई व्यवस्था के तहत जिला खनिज फाउंडेशन यानी DMF की राशि को स्थानीय जरूरतों के अनुसार खर्च करने पर जोर दिया जाएगा. इसका उद्देश्य प्रभावित परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ रोजगार और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है.

10 जिलों के खनन प्रभावित क्षेत्रों पर रहेगा फोकस

नई व्यवस्था से रोहतास, गया, जमुई, औरंगाबाद, नवादा, बांका, भोजपुर, सारण, वैशाली और भागलपुर जैसे खनन प्रभावित जिलों को लाभ मिलने की उम्मीद है. इन जिलों में विकास योजनाएं तय करते समय स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जा सकेगी. इससे अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी जरूरत के अनुसार DMF फंड से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता आसान होगा.

पेयजल, स्कूल और पुस्तकालय जैसी सुविधाओं का विस्तार

संशोधित नियमावली में खनन प्रभावित इलाकों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रावधान किया गया है. DMF की राशि से पेयजल व्यवस्था, स्कूल, पुस्तकालय और युवाओं के लिए कम लागत वाले जिम जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी. इस पहल का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आवश्यक सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता देना है.

खनन बंद होने पर वैकल्पिक रोजगार पर जोर

नई नियमावली में आजीविका को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. खनन बंद होने के बाद इससे जुड़े परिवारों की आय प्रभावित हो सकती है. ऐसे परिवारों को वैकल्पिक और दीर्घकालिक रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए योजनाएं तैयार की जा सकेंगी. इस व्यवस्था के जरिए खनन पर निर्भर परिवारों को दूसरे आर्थिक और आजीविका संबंधी विकल्प उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा ताकि खनन गतिविधियां समाप्त होने के बाद भी उनकी आय जारी रह सके.

पर्यावरण और पुनर्विकास के लिए भी खर्च होगा फंड

DMF फंड का उपयोग खनन से पैदा होने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को कम करने वाले कार्यों में भी किया जा सकेगा. खनन के दौरान ही नहीं गतिविधियां बंद होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास को भी योजनाओं में शामिल किया जाएगा. नई नियमावली से जिलों को स्थानीय जरूरतों के आधार पर योजनाओं की प्राथमिकता तय करने में अधिक सुविधा मिलेगी. इससे उपलब्ध राशि को बुनियादी सुविधाओं, आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और दीर्घकालिक विकास से जोड़ने का रास्ता मजबूत होगा.