विधान परिषद चुनाव में दो सीटें जीतने के बावजूद भाजपा के हुए चार एमएलसी, दोनों निर्दलीय ने थामा दामन

बिहार विधान परिषद चुनाव में पहले तो परिणाम में बड़ा उलटफेर हुआ और अब एक बार फिर ऐसा ही कुछ हुआ है. विधान परिषद चुनाव में भाजपा और राजद ने दो - दो, जदयू और जन सुराज पार्टी ने एक - एक जबकि निर्दलीय ने दो सीटों पर चुनाव जीती.

विधान परिषद चुनाव में दो सीटें जीतने के बावजूद भाजपा के हुए चार एमएलसी, दोनों निर्दलीय ने थामा दामन

पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव में पहले तो परिणाम में बड़ा उलटफेर हुआ और अब एक बार फिर ऐसा ही कुछ हुआ है. विधान परिषद चुनाव में भाजपा और राजद ने दो - दो,  जदयू और जन सुराज पार्टी ने एक - एक जबकि निर्दलीय ने दो सीटों पर चुनाव जीती. लेकिन अब भाजपा के चार एमएलसी हो गए. सारण शिक्षक निर्वाचन सीट से विजयी निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज और तिरहुत स्नातक से दूसरी बार जीत हासिल करने वाले निर्दलीय बंशीधर  ब्रजवासी अब भाजपा में शामिल हो गए. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दोनों को सदस्यता दिलाई. इसमें दिलचस्प यह है कि दोनों उम्मीदवारों ने जदयू के प्रत्याशी को हराया है. सारण शिक्षक सीट से भाजपा के बागी और निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज ने जदयू के आनंद पुष्कर तथा तिरहुत स्नातक सीट से दो बार निर्दलीय प्रत्याशी बंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के उम्मीदवार अभिषेक झा को हराया है.

एनडीए प्रत्याशी के विरोध में हुए थे भाजपा से बाहर

सारण शिक्षक सीट से निर्वाचित राहुल राज पहले भाजपा में थे और वह प्रदेश स्तर के पदाधिकारी भी रह चुके हैं. विधान परिषद चुनाव में वह भाजपा से टिकट के प्रबल दावेदार थे लेकिन सीट बंटवारे में सारण सीट जदयू के खाते में चली गई. जदयू ने अपनी पार्टी से आनंद पुष्कर को उम्मीदवार बनाया जबकि भाजपा के नेता राहुल राज निर्दलीय मैदान में उतर गए. पार्टी और गठबंधन समर्थित प्रत्याशी के विरोध में मैदान में उतरने के बाद भाजपा ने उन्हें 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया और अब एमएलसी बनने पर उनकी घर वापसी हो गई है.

शिक्षकों की आवाज उठा कर दो बार निर्दलीय जीते थे

तिरहुत स्नातक सीट से बंशीधर ब्रजवासी ने निर्दलीय दूसरी बार जीत दर्ज की है. शिक्षकों की मांग को लेकर कई आंदोलनों में उन्होंने भूमिका निभाई थी. उन्होंने शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा दिलाने तथा समान काम का समान वेतन आंदोलन के लिए सरकार से लड़ाई लड़ी थी. इस वजह से उनके विरुद्ध शिक्षा विभाग के तत्कालीन एसीएस एस सिद्धार्थ ने कार्रवाई भी की थी. इसके बाद शिक्षकों की आवाज उठाने का मुद्दा बना कर वह एमएलसी चुनाव में मैदान में उतरे और निर्दलीय दो बार जीत दर्ज की. अब वह भी भाजपा में शामिल हो गए हैं.

इस तरह से चार सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बावजूद सिर्फ दो सीटें जीतने वाली भाजपा के पास एक बार फिर चार एमएलसी हो गए. हालांकि चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही इस बात की चर्चा शुरू हो गई थी. अब दोनों नवनिर्वाचित एमएलसी भाजपा में शामिल हो गए.