बिहार में भ्रष्टाचार की हद, ताबड़तोड़ कार्रवाई भी जारी, इस विभाग में सबसे अधिक मामले

बिहार में इन दिनों भ्रष्ट सरकारी कर्मियों के विरुद्ध लगातार जारी है। करीब हर डेढ़ दिन में एक मामला दर्ज किया जा रहा है। कार्रवाई में 293 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है

बिहार में भ्रष्टाचार की हद, ताबड़तोड़ कार्रवाई भी जारी, इस विभाग में सबसे अधिक मामले

पटना: बिहार में राज्य सरकार के स्तर से भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने की मुहिम निरंतर जारी है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के स्तर से भ्रष्टाचारियों को दबोचने या नकेल कसने की कार्रवाई निरंतर जारी है। मौजूदा वर्ष के दौरान इसमें काफी तेजी दर्ज की गई है। पिछले 25 वर्षों में भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने का औसत 5.6 था, जबकि सिर्फ 2026 में 16 अक्टूबर तक 22 भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाई जा चुकी है। पिछले 25 वर्षों के औसत से इसकी तुलना करें, तो इस वर्ष यह चार गुणा अधिक है यानी इसमें 293 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

हर तीन दिन में दो मामले हो रहे दर्ज

निगरानी ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने जानकारी देते हुए बताया कि मौजूदा समय में प्रत्येक 1.5 दिन में किसी न किसी भ्रष्टाचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि हर तीन दिन में दो भ्रष्टाचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाती है। 2025 में प्रत्येक 2 दिन में एक एफआईआर और वर्ष 2024 तक औसतन 11.5 दिन में एक एफआईआर दर्ज होती थी। निगरानी ब्यूरो के स्तर से भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने के साथ ही उन्हें सजा दिलाने में भी तेजी आई है। उन्होंने कहा कि अभी ट्रायल कराने में औसतन 13 वर्ष का समय लग रहा, जिसे कम करने पर खासतौर से फोकस किया जा रहा है। इसके लिए अतिरिक्त संख्या में विशेष निगरानी कोर्ट का गठन करने के से लेकर समय पर गवाही कराने एवं चार्जशीट दायर करने समेत अन्य बेहद जरूरी कार्यों पर खासतौर से फोकस किया जा रहा है। 

कार्रवाई और सजा दिलाने में आई तेजी

डीजी जितेंद्र गंगवार ने बताया कि कार्रवाई की रफ्तार पर भी नजर डालें, तो इसमें काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। निगरानी ब्यूरो के स्तर से 25 वर्षों के दौरान सभी तरह के मामलों यानी ट्रैप, आय से अधिक संपत्ति और पद के भ्रष्ट दुरुपयोग में कांड दर्ज करने का औसत 73 था। 2026 में यह बढ़कर 124 हो गया। इस तरह इसमें 70 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगर सिर्फ ट्रैप के मामले पर नजर डालें, तो पिछले 25 वर्षों के दौरान औसतन 47 मामले दर्ज हुए थे, जबकि इस वर्ष अब तक 113 मामले दर्ज हो चुके हैं। इसमें 140 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वर्ष के अंत तक इसमें 142 तक पहुंचने की संभावना है। इसी तरह डीए के मामलों में 25 वर्षों का औसत 8 था। वहीं, इस वर्ष यह बढ़कर 10 हो गया। इसमें 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एओपीए से संबंधित कांड 25 वर्षों में 18 दर्ज किए गए थे और इस वर्ष 2 मामले दर्ज हुए हैं। उन्होंने कहा कि एओपीए में मामले कम दर्ज होने के पीछे मुख्य कारण इससे जुड़ा नया प्रावधान है, जिसमें अब किसी लोक सेवक के खिलाफ पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज करने से पहले संबंधित विभाग से इसके लिए अनुमति लेना अनिवार्य हो गया है। विभागीय अनुमति मिलने में देरी होने के कारण अधिक समय लग रहा है। इसके अलावा शिक्षक जांच के मामले में अब तक हुई कार्रवाई को देखें, तो पिछले 11 वर्षों से इसकी जांच चल रही है और अब तक कुल 1717 एफआईआर दर्ज हुई है। औसतन प्रत्येक वर्ष 156 एफआईआर दर्ज की जाती थी। जबकि सिर्फ इस वर्ष अकेले 166 कांड दर्ज किए गए। इसमें 42 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भ्रष्ट विभाग में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अव्वल

निगरानी के डीजी ने कहा कि जिन कुछ विभागों से ट्रैप की कार्रवाई के तहत सबसे ज्यादा घूस लेते रंगे हाथ पकड़े लोक सेवक दबोचे गए हैं, उसमें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अव्वल है। इसके बाद पुलिस, पंचायती राज, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन समेत अन्य विभाग शामिल हैं। इस वर्ष हुई कार्रवाई पर नजर डालें, तो राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से 20, पुलिस के 17, पंचायती राज विभाग के 12 भ्रष्ट लोक सेवक ट्रैप में दबोचे जा चुके हैं। अगर ट्रैप में रिश्वत की राशि लेते पकड़े जाने वाले लोक सेवकों की बात कहें, तो इस वर्ष औसतन 34 हजार 667 रुपये घूस की राशि जब्त की गई है। ट्रैप की कार्रवाई सभी जिलों में बड़ी संख्या में हुई है, लेकिन सबसे ज्यादा राजधानी पटना और आसपास के इलाकों में ही हुई है। इस मौके पर डीआईजी राकेश कुमार सिन्हा, एसपी मनोज कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।