बिहार के 638 पुलों की हुई व्यापक समीक्षा, सुरक्षा और रखरखाव को लेकर विभागीय सचिव ने दिए कड़े निर्देश

बिहार के 638 पुलों की हुई व्यापक समीक्षा, सुरक्षा और रखरखाव को लेकर विभागीय सचिव ने दिए कड़े निर्देश

पटना(PATNA):बिहार में पुलों की सुरक्षा, मजबूती और रखरखाव को लेकर पथ निर्माण विभाग ने बड़ी पहल की है. विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्यभर के 60 मीटर से अधिक लंबे 638 पुलों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNNL) के अधिकारियों और विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं ने हिस्सा लिया.

638 पुलों के जांच पूरी

बैठक के दौरान अधिकारियों ने सचिव को बताया कि राज्य में 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले कुल 638 पुलों को चिन्हित कर उनकी विस्तृत जांच पूरी कर ली गई है. इन पुलों की संरचनात्मक स्थिति, सुरक्षा मानकों और वर्तमान उपयोगिता का आकलन किया गया है. पश्चिम चंपारण, पटना, मुजफ्फरपुर, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, सुपौल, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, गया, नवादा, जमुई और सहरसा समेत विभिन्न जिलों के पुलों की गहन जांच की गई.

मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य पहले से चल रहा है

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि 23 पुल ऐसे हैं जिनकी स्थिति गंभीर मानी गई है और उन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. इनमें से 10 पुलों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य पहले से चल रहा है. वहीं पांच ऐसे स्थानों की पहचान की गई है जहां नए पुलों का निर्माण कराया जाएगा.विभाग का मानना है कि इन स्थानों पर नए पुल बनने से न केवल आवागमन बेहतर होगा बल्कि लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी.

कुछ पुलों पर केवल छोटे और हल्के वाहनों को ही चलने की अनुमति

यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए फिलहाल चार पुलों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. इन पुलों पर केवल छोटे और हल्के वाहनों को ही चलने की अनुमति दी गई है.इसके अलावा एक अन्य संवेदनशील स्थल पर वैकल्पिक डायवर्जन निर्माण का कार्य तेजी से कराया जा रहा है ताकि लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो.

50 पुलों की मरम्मती का काम शुरू

समीक्षा बैठक में यह भी बताया गया कि आठ पुलों के रखरखाव और मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है. सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि टेंडर की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी कर कार्य शुरू कराया जाए. इसके अतिरिक्त 50 पुल ऐसे पाए गए हैं जिन्हें सामान्य मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता है. इन पुलों पर विभागीय अभियंताओं की निगरानी में तेजी से काम चल रहा है.बैठक में आईआईटी पटना द्वारा किए गए सर्वेक्षण की भी समीक्षा की गई. अधिकारियों ने बताया कि राज्य के 250 मीटर से अधिक लंबे और अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले 47 पुलों की जांच आईआईटी पटना की टीम द्वारा की गई है.संस्थान की प्रारंभिक रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.

 47 अहम पुलों की स्थिति पर कार्रवाई तेज

सचिव पंकज कुमार पाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पुलों की नियमित निगरानी की व्यवस्था और मजबूत की जाए ताकि किसी भी संभावित खतरे या क्षति की जानकारी समय रहते मिल सके उन्होंने कहा कि समय पर मरम्मत और रखरखाव से बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जिन प्रमंडलों में कार्य की गति धीमी पाई जाएगी या गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी मिलेगी, वहां संबंधित अभियंताओं के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

पढ़िये सचिव पंकज कुमार ने क्या कहा

समीक्षा बैठक के दौरान सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्य में सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. इसी उद्देश्य से पुलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जहां भी आवश्यकता महसूस हो रही है वहां तत्काल कार्रवाई की जा रही है उन्होंने दोहराया कि पुलों की सुरक्षा और रखरखाव के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.विभाग की इस व्यापक समीक्षा को बिहार के पुलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.आने वाले दिनों में मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और नए पुलों के निर्माण कार्यों में और तेजी देखने को मिल सकती है.