BREAKING: पटना में EOU की बड़ी कार्रवाई, भवन निर्माण निगम के GM कमलेश कुमार के ठिकानों पर छापेमारी

बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक (तकनीकी) कमलेश कुमार के खिलाफ EOU ने आय से अधिक संपत्ति मामले में बड़ी कार्रवाई की है. पटना और वैशाली समेत उनसे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी और दस्तावेजों की जांच जारी है.

BREAKING: पटना में EOU की बड़ी कार्रवाई, भवन निर्माण निगम के GM कमलेश कुमार के ठिकानों पर छापेमारी

पटना (PATNA): बिहार में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है. बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक (तकनीकी) कमलेश कुमार से जुड़े कई ठिकानों पर EOU की अलग-अलग टीमें छापेमारी कर रही हैं. कमलेश कुमार के खिलाफ कथित तौर पर 3 करोड़ 12 लाख रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है.

मामला दर्ज होने के बाद शुरू हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, आर्थिक अपराध इकाई ने कमलेश कुमार के खिलाफ सोमवार देर शाम मामला दर्ज किया था. उन पर अपनी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है. मामला दर्ज होने के बाद विशेष न्यायालय से तलाशी की प्रक्रिया पूरी कर EOU की विशेष टीमों ने मंगलवार को अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की.

पटना और वैशाली में तलाशी

EOU की टीम कमलेश कुमार से जुड़े पटना और वैशाली स्थित परिसरों की तलाशी ले रही है. इनमें पटना के एसके पुरी इलाके से जुड़ा आवास भी शामिल बताया जा रहा है. जांच टीम संपत्ति, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है. इस कार्रवाई के लिए EOU की कई विशेष टीमों को लगाया गया है. छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों की जांच के बाद ही संपत्ति और लेनदेन से जुड़ी पूरी तस्वीर स्पष्ट होने की संभावना है.

पटना के आवास पर रहते हैं किरायेदार

आर्थिक अपराध इकाई के डीएसपी विजय कुमार गुप्ता के मुताबिक, पटना स्थित आवास पर फिलहाल किरायेदार रहते हैं. तलाशी के दौरान कमलेश कुमार से जुड़ी कुछ सामग्री मिलने की बात सामने आई है. टीम इन सामानों और दस्तावेजों की जांच कर रही है.

3.12 करोड़ रुपये से अधिक की कथित आय से अधिक संपत्ति

EOU की जांच का मुख्य आधार कमलेश कुमार के पास कथित तौर पर उनकी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति होना है. प्रारंभिक मामले में यह राशि 3.12 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है. हालांकि, छापेमारी और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद संपत्ति से संबंधित और जानकारी सामने आ सकती है.