टीएनपी डेस्क (TNP DESK):बिहार की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को अब नई पहचान मिलने वाली है. राज्य सरकार इन प्राचीन स्थलों का वैज्ञानिक सर्वे, संरक्षण और विकास कर उन्हें विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी में है. इससे न सिर्फ बिहार की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस दिशा में अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है.मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की हजारों साल पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक की मदद से संरक्षित किया जाएगा. इससे राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी. साथ ही पर्यटन बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
वैज्ञानिक सर्वे से बनेंगे विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र
बैठक में देश के वरिष्ठ पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों ने कैमूर जिले के मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों के सर्वे की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी. रिपोर्ट में बताया गया कि मंदिर परिसर में बिखरे हजारों प्राचीन अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, पुनर्स्थापन और दस्तावेजीकरण किया जा सकता है. मुख्यमंत्री ने पूरे क्षेत्र को प्रमुख हेरिटेज पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया.बैठक में कैमूर के तिलहाड़ कुंड, करकटगढ़ और अन्य प्राकृतिक व ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को जोड़कर हेरिटेज और इको-टूरिज्म सर्किट बनाने पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र भविष्य में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है. इन स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे.
बेहतर तरीके से विकसित कर धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा
मुख्यमंत्री ने बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) और GPR (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार) तकनीक से सर्वे कराने का निर्देश दिया. इन तकनीकों की मदद से बिना खुदाई किए जमीन के अंदर मौजूद संभावित पुरातात्विक अवशेषों की पहचान की जा सकेगी.बैठक में सुल्तानगंज और मंदार के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास पर भी जोर दिया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्थलों को बेहतर तरीके से विकसित कर धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा.
बिहार की धरती के नीचे आज भी कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरें मौजूद
विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के बचे हुए हिस्सों का वैज्ञानिक उत्खनन भी कराया जाएगा. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों की अब तक खुदाई नहीं हुई है, वहां संभावित पुरातात्विक अवशेषों की खोज और संरक्षण का काम तेज किया जाए.मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की धरती के नीचे आज भी कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरें मौजूद हैं. इनके वैज्ञानिक सर्वे, उत्खनन और संरक्षण से राज्य के इतिहास के कई नए तथ्य सामने आएंगे. साथ ही सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

