बेटे की कुर्सी तो बच गई, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा की असली परीक्षा अभी बाकी! मार्च 2027 से पहले बीजेपी रख सकती है बड़ी शर्त!

बेटे की कुर्सी तो बच गई, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा की असली परीक्षा अभी बाकी! मार्च 2027 से पहले बीजेपी रख सकती है बड़ी शर्त!

धनबाद(DHANBAD): बिहार में उपेंद्र कुशवाहा भले ही अपने मंत्री बेटे की कुर्सी बचाने में फिलहाल सफल हो गए हैं, लेकिन उनका संकट अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है.  बेटे दीपक प्रकाश  का कार्यकाल मार्च 202 7 तक ही है.  मार्च 27 के पहले दीपक प्रकाश को अगर मंत्री पद पर बनाए रखना है ,तो या तो उपेंद्र कुशवाहा को फिर भाजपा से एक सीट लेनी होगी अथवा अपनी  पार्टी  को बीजेपी में विलय करने के ऑफर को स्वीकार करना होगा.दरअसल, पिछली बार जब विधान परिषद का चुनाव हुआ था, उस समय उपेंद्र कुशवाहा मानकर चल रहे थे कि भाजपा उनके बेटे को उम्मीदवार बनाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 

 उसके बाद उपेंद्र कुशवाहा ने एड़ी चोटी का जोर लगाकर राज्यपाल द्वारा मनोनीत भाजपा के एमएलसी से इस्तीफा करवाकर  अपने बेटे को एमएलसी बनवा लिया है.  लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि भाजपा में पार्टी के विलय की वजह से ही उपेंद्र कुशवाहा की परेशानी बढ़ी थी.  लेकिन मार्च 27 के पहले यह  परेशानी उन्हें और अधिक परेशान कर सकती है. बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के चार विधायक है.  पत्नी को छोड़कर  तीन विधायक एक गुट  की तरह पार्टी में बने हुए हैं.   नीतीश कुमार की पिछली सरकार में जब उपेंद्र कुशवाहा ने पहली बार जब दीपक प्रकाश को मंत्री बनवाया था, तो ऐसा लगने लगा था कि तीन विधायक माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो पार्टी तोड़कर अलग हो सकते हैं.  लेकिन तब उपेंद्र कुशवाहा ने उस विवाद को सुलझा लिया था. 

 सूत्र बताते हैं कि मार्च से पहले उपेंद्र कुशवाहा पर विलय का दबाव बढ़ेगा और ऐसा नहीं करने पर भाजपा दीपक प्रकाश की विदाई का रास्ता खोल सकती है.  अब उपेंद्र कुशवाहा आगे क्या करते हैं, इस पर सब की दिलचस्पी  रहेगी। उल्लेखनीय है कि  जून 2026 में बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर जब द्वि  वार्षिक चुनाव हुए थे.  उस समय उपेंद्र कुशवाहा भाजपा की मदद से अपने मंत्री बेटे को सदन भेजने की उम्मीद लगाए बैठे थे.  एनडीए के 9 उम्मीदवारों में जब दीपक प्रकाश का नाम नहीं आया, तब उन्हें परेशानी हुई.  उनके बेटे का मंत्री पद पर भी संकट बढ़ गया.  

दीपक प्रकाश 7 मई  को सम्राट कैबिनेट विस्तार के दौरान दूसरी बार मंत्री पद की शपथ ली थी.  इससे पहले नवंबर 2025 में वह तत्कालीन नीतीश कुमार कैबिनेट में शामिल किए गए थे.  उपेंद्र कुशवाहा खुद राज्यसभा सांसद हैं, उनकी पत्नी स्नेह लता कुशवाहा विधायक हैं और उनके बेटे दीपक प्रकाश बिहार सरकार में मंत्री और अब विधान परिषद के सदस्य हो गए हैं. बिहार विधान सभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा के उम्मीदवार को बाजपट्टी, मधुबनी, सासाराम और दीनारा सीट से जीत मिली. बाजपट्टी में रामेश्वर कुमार महतो ने 3395 वोट से जीत हासिल की. उन्होंने राजद के मुकेश यादव को कड़े मुकाबले में हराया. मधुबनी में माधव आनंद को 20552 वोटों के अंतर से जीत मिली. सासाराम से उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता ने 25000 के अधिक मार्जिन से और दिनारा में आलोक कुमार सिंह ने 10834 वोट से विपक्षी उम्मीदवार को हराया था.