प्रशांत किशोर के शिक्षा दांव के बाद भाजपा भी हरकत में, बिहार में एजुकेशन पर बढ़ा फोकस

प्रशांत किशोर  के शिक्षा दांव के बाद भाजपा भी हरकत में, बिहार में एजुकेशन पर बढ़ा फोकस

टीएनपी डेस्क :  बांकीपुर चुनाव हारने के बाद भाजपा दबाव में है. जनसुराज की तरह भाजपा भी बिहार में शिक्षा को हथियार बनाने की कोशिश में है. बिहार में फिलहाल स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 18000 करोड रुपए देकर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में भेजती है. बता दे कि  जनसुराज  के सूत्रधार प्रशांत किशोर शिक्षा को हथियार बनाकर आगे बढ़ रहे है. पलायन  रोकने पर उनका फोकस है.  उन्होंने ऐलान कर दिया है कि 1 साल के भीतर बांकीपुर विधानसभा के सभी सरकारी स्कूल या तो अपग्रेड होंगे या फिर विधानसभा के गरीब बच्चे सरकारी स्कूल में पड़ेंगें  और उसका खर्चा जनसुराज  उठाएगा। इस घोषणा की पूरे बिहार में चर्चा हो रही है.  उसके बाद बिहार सरकार ने भी शिक्षा पर फोकस किया है.  

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कह दिया है कि बिहार में ऐसी शिक्षा व्यवस्था करने जा रहे हैं कि मंत्री और विधायक से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारी  भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएंगे, अगले 1 से 2 साल में ऐसी व्यवस्था बनाने का लक्ष्य है.  अभी सिर्फ गरीबों के बच्चे ही सरकारी स्कूलों में जाते हैं.  सरकार इन स्कूलों को हाईटेक बनाने की दिशा में काम कर रही है.  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 551 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल खोले गए हैं.  लाइव क्लासेस की शुरुआत भी की जा रही है.  सरकारी स्कूलों में नीट  और जेईई  की पढ़ाई की व्यवस्था भी हो रही है.  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को पटना के ज्ञान भवन में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. 

 मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी बिहार के लाखों बच्चों को पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ता है.  स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 18000 करोड रुपए बिहार सरकार देकर अपने ही बच्चों को दूसरे राज्य में पढ़ाई के लिए भेजती है.   सम्राट चौधरी ने मठ  और मंदिरों से भी आग्रह किया कि वह एक-एक कॉलेज और स्कूल खोले, सरकार उन्हें मान्यता देगी।  उन्होंने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में राज्य में 400 से अधिक और डिग्री कॉलेज खोले  जा रहे है.इस बीच जानकारी मिली है कि बिहार शिक्षा विभाग करीब 20,000 सब्जेक्ट एक्सपर्ट शिक्षकों का चयन करने की तैयारी कर रहा है.  राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल  से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर निजी स्कूलों के बराबर लाया जा सकेगा।  नई पहल के तहत सरकार का लक्ष्य राज्य के कक्षा 9 और उससे ऊपर पढ़ाने  वाले करीब डेढ़ लाख शिक्षकों में से सबसे अच्छे एक्सपर्ट शिक्षकों की पहचान करना है.  चुने गए शिक्षक अपने साथी शिक्षकों का मार्गदर्शन करेंगे।