Bihar Politics: नीतीश कुमार की पार्टी का नाम क्या अब बदल जाएगा? नाम बदलने का क्या है कायदा-कानून, पढ़िए 

जदयू का नाम बदलकर जनता दल (नीतीश) करने की चर्चा तेज है. जानिए नाम बदलने की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के नियम.

Bihar Politics: नीतीश कुमार की पार्टी का नाम क्या अब बदल जाएगा? नाम बदलने का क्या है कायदा-कानून, पढ़िए

पटना (PATNA): तो क्या अब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी का नाम बदल जाएगा? नाम अब जनता दल यूनाइटेड नहीं रहेगा? क्या अब पार्टी का नाम जनता दल (नीतीश) हो जाएगा. बिहार के जदयू के बड़े नेताओं ने ऐसा ही कुछ सुझाव दिया है. सूत्र बता रहे हैं कि नाम बदलने की तैयारी तेज हो गई है. राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के प्रस्ताव पर अब उपमुख्यमंत्री विजेंद्र यादव और मंत्री श्रवण कुमार ने भी समर्थन दे दिया है. 

संजय झा ने 24 घंटे पहले जनता दल यूनाइटेड का नाम बदलकर जनता दल (नीतीश) रखने की अपील पार्टी के नेताओं से की थी. अब धीरे-धीरे पार्टी इस पर एक राय होती नजर आ रही हैं. हालांकि अंतिम फैसला नीतीश कुमार को लेना है. नाम बदलने का पार्टी की सेहत पर कितना असर पड़ेगा और ऐसा क्यों किया जा रहा है, इसको लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं. उल्लेखनीय है कि किसी राष्ट्रीय या प्रदेश स्तर के राजनीतिक दल का नाम बदलने के लिए सबसे पहले पार्टी के सर्वोच्च इकाई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव पारित करना होता है. 

इसके बाद पार्टी के नाम की सूचना जारी करनी होती है. फिर एक लिखित आवेदन चुनाव आयोग को भेजा जाना होता है. उसमें नाम परिवर्तन के लिए पारित प्रस्ताव की कॉपी, पार्टी के संविधान में संशोधन का विवरण और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत बड़े पदाधिकारी के समर्थन से जुड़े शपथ पत्र शामिल होते हैं. चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि नया नाम किसी मौजूदा रजिस्टर्ड या मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल से मिलता-जुलता तो नहीं है. जांच के बाद अगर कोई आपत्ति नहीं मिलती है, तो आयोग से नाम परिवर्तन की मंजूरी मिल जाती है. 

दरअसल, जदयू की कहानी 2003 से शुरू होती है. 2003 में जार्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली समता पार्टी का शरद यादव गुट वाले जनता दल में विलय कर दिया गया था. विलय के बाद नई पार्टी का नाम जनता दल यूनाइटेड रखा गया. इसमें जनता दल का तीर चिह्न, समता पार्टी का हरा और सफेद झंडा को मिलाकर जेडीयू का चुनाव चिह्न बनाया गया था. 2005 में जदयू बिहार की सत्ता पर पहली बार काबिज हुई और तब से लगभग दो दशक तक नीतीश कुमार बिहार की सत्ता पर काबिज रहे. 2026 में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और बिहार में एनडीए सरकार की कमान सहयोगी दल भाजपा के नेता सम्राट चौधरी को सौंप दी गई.