Bihar Politics: प्रदेश की राजनीति से "आउट" हो चुके नीतीश कुमार क्या फिर लौटेंगें, सक्रिय हुए तो क्यों टेंशन में आए दूसरे दल, पढ़िए
बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत दिख रहे हैं. नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर समेत सभी दल संगठन और कार्यकर्ताओं को मजबूत करने में जुटे हैं.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अब तो पुख्ता ढंग से कहा जा सकता है कि बिहार की राजनीति बदल रही है. सम्राट चौधरी सरकार पर भी दबाव है, बिहार की राजनीति से लगभग "आउट" हुए नीतीश कुमार फिर से "इन "करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. वह लगातार सप्ताह में तीन-चार दिन पार्टी दफ्तर पहुंच रहे हैं. कार्यकर्ताओं से सीधे मिल रहे हैं. अभी तक ठंठा पड़ी जदयू और राजद जैसी पार्टियों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है. बिहार के राजनीतिक गलियारों में तेज हलचल दिख रही है. सभी दल अपने कार्यकर्ताओं और बूथ की संरचना को ठोस करने में जुट गए हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मोर्चा संभाल लिए हैं. दूसरी ओर तेजस्वी यादव और अन्य दल भी अपने कैडर को एकजुट करने में सक्रिय हो गए हैं. कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर की राजनीति ने बिहार में पार्टियों को अपनी रणनीति बदलने को मजबूत कर दिया है. प्रशांत किशोर ने सितंबर महीने में बिहार के सभी जिलों में यात्रा करने का निर्णय लिया है, तो अक्टूबर महीने से पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी यात्रा पर निकलेंगे, मतलब दोनों नेता बिहार के 38 जिलों में संगठन पर काम करेंगें. ऐसा नहीं है कि भाजपा चुप बैठी हुई है. वह भी संत रविदास मिट्टी कलश यात्रा निकालने की योजना बना रही है. कलश बंदन कार्यक्रम के अंतर्गत भाजपा के सभी मंडलों में कलश को भेजा जाएगा.
इधर, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बाद और भी पार्टियां अपनी रणनीति बदल रही हैं. तेजस्वी यादव छोटी-छोटी समस्याओं पर धरना प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं. छात्र आंदोलन का वह सपोर्ट कर रहे हैं. इसके पहले वह सोशल मीडिया पर ही सरकार पर हमलावर रहते थे. कहा जा सकता है कि प्रशांत किशोर के साथ-साथ आरजेडी, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी, जीतन राम मांझी की पार्टी अपने समर्थकों को गोलबंद करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है. एनडीए के घटक चिराग पासवान का ध्यान भी बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में पार्टी का जन आधार बढ़ाने में लगा हुआ है.
इधर, जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ने प्रदेश कमेटी, जिला अध्यक्षों की नई सूची जारी कर दी है. प्रदेश कमेटी में 18 प्रदेश उपाध्यक्ष, 38 प्रदेश महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, 27 सचिव, दो मीडिया प्रभारी,16 प्रदेश कार्य समिति सदस्यों की सूची जारी की गई है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिहार में क्या बदलाव की नई पटकथा लिखी जा रही है? सम्राट चौधरी सरकार भी सक्रिय हो गई है, तो केंद्र का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है. सरकार रोजगार मेले का आयोजन कर रही है. बुधवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सड़क पर उतरे. कई सालों के बाद उन्होंने अपना तेवर दिखाया.
राजद के लोगों का भी उन्हें पूरा सहयोग मिला. तो बांकीपुर सीट से प्रशांत किशोर उपचुनाव जीतने के बाद लगातार सक्रिय हैं. वह दावा कर रहे हैं कि बहुत जल्द बांकीपुर विधानसभा को आदर्श विधानसभा बनाकर लोगों के सामने उदाहरण पेश करेंगें. इस दिशा में वह सक्रिय भी देखे जा रहे हैं. इधर, गुरुवार को केंद्र सरकार ने बिहार को एक बड़ा तोहफा दिया है. बिहार के 11 लाख से अधिक परिवारों को पक्का मकान मिलने की स्वीकृति पत्र मुख्यमंत्री को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिया है. लगभग 35,000 लाभुकों को नए घर की चाबी भी दी गई है और नए आवास निर्माण की स्वीकृति पत्र भी प्रदान किया गया है. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने घोषणा की है कि बिहार की कोई भी बहन कच्चे मकान में नहीं रहेगी. आज 11.18 लाख पक्का मकान की स्वीकृति दी गई है. आगे सर्वे में जो शेष बचे हैं, सभी के लिए पक्का मकान बनेंगें,
उन्होंने घोषणा की, जीविका दीदी को उनके उत्पाद को बाजार देने के लिए भारत सरकार हाट बनाएगी, कहा कि बिहार में फसल बीमा योजना लागू की जा रही है, इससे किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा. बुधवार को छात्र आंदोलन के दौरान सिवान में एके -47 से फायरिंग सहित अन्य मुद्दों को लेकर तेजस्वी यादव सड़क पर उतरे. बहुत दिनों के बाद राजद के लोग अपना दम दिखाया. जानकार बताते हैं कि लालू प्रसाद यादव की पार्टी लगभग 11 साल बाद बुधवार को राजभवन मार्च करने निकली. इन 11 साल में वह तीन-चार साल सरकार में भी रही. जानकारी के अनुसार राजद इससे पहले 2015 में राजभवन मार्च किया था. लालू यादव तब सरकार से 2011 की जनगणना में जातीय गणना की रिपोर्ट जारी करने की मांग कर रहे थे. तेजस्वी यादव भी लगभग 5 साल के बाद सड़क पर पैदल मार्च करते हुए संघर्ष करते दिखे. मार्च 2021 में विधानसभा परिसर में राजद समेत विपक्षी विधायकों से पुलिस की बदसलूकी के खिलाफ तेजस्वी यादव ने विधानसभा मार्च का प्रयास किया था. लेकिन वह अरेस्ट हो गए थे. उस समय राजद कार्यकर्ताओं की पिटाई भी हुई थी.