Bihar MLC Result: जदयू में क्यों बन सकता है नया "पावर सेंटर",भाजपा के सवर्ण वोटरों की भी क्यों होगी परीक्षा ?
बिहार विधान परिषद का चुनाव परिणाम कई बातों को तय करेगा। एक तो जदयू में "पावर सेंटर" कहा और किसके पास रहेगा , यह तय होगा, तो दूसरी ओर भाजपा के सवर्ण वोटर किसके साथ हैं, इसका भी पता चल जाएगा।
TNP DESK- बिहार विधान परिषद का चुनाव परिणाम कई बातों को तय करेगा. एक तो जदयू में "पावर सेंटर" कहा और किसके पास रहेगा , यह तय होगा, तो दूसरी ओर भाजपा के सवर्ण वोटर किसके साथ हैं, इसका भी पता चल जाएगा. पटना के बांकीपुर उप चुनाव हारने के बाद भाजपा के कोर वोटर माने जाने वाले सवर्ण वर्ग का भरोसा अभी भी भाजपा में कायम है या नहीं, इसके भी संकेत मिल सकते है. प्रशांत किशोर को कितना समर्थन मिलता है और वह भाजपा,राजद ,कांग्रेस के वोट बैंक में कितनी सेंधमारी कर पाते हैं, यह भी विधान परिषद चुनाव का परिणाम साफ कर देगा.दूसरी ओर जदयू के दो नेताओं का भविष्य भी तय कर सकता है.
8 सीटों पर शुक्रवार को मतदान के बाद 27 अक्टूबर को नतीजे आएंगे
उल्लेखनीय है कि बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर शुक्रवार को मतदान खत्म हो गया है. 27 अक्टूबर को नतीजे आएंगे। पूरे चुनाव में सबसे अधिक चर्चा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की रही. इस सीट पर जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार चुनाव मैदान में हैं , वहीं जदयू के ही बाहुबली विधायक अनंत सिंह जनसुराज के प्रत्याशी डॉक्टर अनुज सिंह का समर्थन किया। जदयू के वरिष्ठ नेताओं के मना करने के बाद भी अनंत सिंह नहीं माने और डॉक्टर अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार करते रहे. अब सब की निगाहें पटना स्नातक सीट पर टिक गई है. इस चुनाव का परिणाम कई नेताओं के पार्टी में भविष्य को भी तय कर सकता है. इधर, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम की चर्चा के साथ ही अनंत सिंह पर पार्टी की कार्रवाई को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है.
अनंत सिंह कह चुके हैं कि -"न मरने का गम है ना जीने की खुशी"
अनंत सिंह कह चुके हैं कि -"न मरने का गम है ना जीने की खुशी" उनके इस बयान को अलग-अलग नजरिया से देखा जा रहा है. अगर नीरज कुमार चुनाव हारते हैं और डॉक्टर अनुज सिंह की जीत होती है, तो इसमें अनंत सिंह की भूमिका बड़ी मानी जाएगी। इसमें कोई संदेह नहीं है. इसके साथ ही पार्टी के भीतर अनंत सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है. नीरज कुमार चुनाव हारे या जीते, लेकिन वह अनंत सिंह के खिलाफ बोलते रहेंगें. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की भी परीक्षा होगी। अनंत सिंह के रुख से जदयू के भीतर "पावर सेंटर" को लेकर भी कुछ हो सकता है. अनंत सिंह राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और निशांत कुमार की बात नहीं मानी थी.
अनंत सिंह ने संजय झा -निशांत कुमार के खिलाफ सीधे कुछ क्या नहीं कहा
अनंत सिंह दोनों का नाम लेकर सीधे तौर पर कोई हमला तो नहीं किया, लेकिन नीरज कुमार के बारे में वह लगातार बोलते रहे. इतना ही नहीं, बीजेपी के लिए एमएलसी चुनाव परिणाम लिटमस टेस्ट साबित हो सकता है. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में सवर्ण मतदाताओं के झुकाव को लेकर उठे सवालों के बीच अब सब की नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा के सवर्ण वोटर क्या अब भी भाजपा के साथ हैं अथवा नाराज हैं? वैसे जनसुराज भी सभी 8 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे है. ऐसे में जनसुराज के प्रदर्शन पर भी सबकी नजर होगी। यदि जनसुराज अपने प्रदर्शन से बीजेपी, कांग्रेस और राजद के वोट बैंक में सेंधमारी करता है, तो इसका असर सभी दलों राजद और कांग्रेस समेत अन्य दलों के लिए भी यह समीक्षा का संकेत हो सकता है.