टीएनपी डेस्क(TNP DESK):बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब पुलिस वालों के खिलाफ गाज गिरी है.जहां एनकाउंटर के पांच दिन बाद पुलिस वालों पर हत्या का मुक़दमा दर्ज़ किया गया है.भरत तिवारी के परिजनों की ओर से जो एफआईआर दर्ज की गई थी उस पर कार्यवाई की गई है जिसमें जगदीशपुर के एस.डी.पी.ओ. राजेश शर्मा, शाहपुर के तत्कालिन थाना अध्यक्ष राजेश मालाकार को नामजद और उनके साथ मुठभेड़ के दौरान मौजुद रहे अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है.
सीएम ने दिए जांच के आदेश
आपको बता दें कि 17 जून को भोजपुर जिले में हुए इस एनकाउंटर ने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी थी. सभी लोग बिहार सरकार और पुलिस की इस रवैया पर सवाल उठा रहे थे. वही इस मामले पर बड़ी कार्रवाई हुई है.मामले को तूल पकड़ता देख मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त जज से मामले की जांच करने का आदेश दिया है.
राजद ने भी उठाए सवाल
आपको बता दें कि राजद की ओर से उससे भी एनकाउंटर को लेकर कई सवाल उठे जा रहे है. इस मामले पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने बड़ा बयान देते हुए बिहार पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए है.सुधाकर सिंह ने दावा किया कि भरत तिवारी का एनकाउंटर फर्जी था और यह कार्रवाई एडीजी कुंदन कृष्णन के निर्देश पर कराई गई.
एनकाउंटर के लिए पटना से विशेष एसटीएफ टीम भेजी गई थी
उन्होंने आरोप लगाया कि इस एनकाउंटर के लिए पटना से विशेष एसटीएफ टीम भेजी गई थी.राजद सांसद ने यह भी कहा कि वह पिछले एक वर्ष से दीपक कुमार के खिलाफ कथित तौर पर कई मामलों का खुलासा कर रहे थे.इसी वजह से उन्हें एडीजी कुंदन कृष्णन द्वारा फोन पर धमकी दी गई थी.उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से भी मुलाकात कर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी.
एनकाउंटर की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग
सुधाकर सिंह ने कहा कि 25 वर्षों के राजनीतिक जीवन में पहली बार वह मुख्यमंत्री से मिलने गए थे और बाद में गृह मंत्री से भी इस मामले को लेकर चर्चा की थी. उन्होंने भरत तिवारी एनकाउंटर की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.

