बांकीपुर सीट का परिणाम: भाजपा में पटना से दिल्ली तक बैठक तो लालू की पार्टी में कैसे मच गया है घमासान, अब आगे क्या  

बांकीपुर सीट का परिणाम: भाजपा में पटना से दिल्ली तक बैठक तो लालू की पार्टी में कैसे मच गया है घमासान, अब आगे क्या

टीएनपी डेस्क: बिहार की राजनीति में हलचल है. भाजपा में बेचैनी है तो राजद में घमासान  मच गया है. कारण  बांकीपुर सीट पर पराजय ही है. भाजपा में बैठकों का दौर जारी है ,तो राजद में आरोप -प्रत्यारोप तेज हो गया है.  पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की.  यह मुलाकात बिहार की बांकीपुर सीट के चुनाव परिणाम से भी जोड़कर देखा जा रहा है. इधर , बुधवार को पटना में मंथन शुरू हो गया है.  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक की गई. इसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद थे और हार  के कारणों  पर मंथन किया गया.  

पार्टी के नेताओं से फीडबैक लिया गया.  यह  बैठक लगभग ढाई घंटे तक चली.  इसमें भाजपा के मंत्री, पटना के विधायक, सांसद और पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी सहित चुनाव ड्यूटी में लगे नेता मौजूद थे.  लगभग 31 वर्ष तक भाजपा का गढ़ रहे बांकीपुर  के उपचुनाव में किन वजहों से पार्टी हारी , इस पर विस्तार से चर्चा की गई.  भाजपा की बैठक में शामिल होकर निकले मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि बांकीपुर में हार  की विस्तार से समीक्षा होगी।  वहां की जनता हमारी है, जहां कमी रही, वह पता लगाया जाएगा।  उन्होंने बड़ी बात यह कह दी कि  बांकीपुर  से चुनाव जीतने वाले प्रशांत किशोर ने 3 महीने में बदलाव देखने का दावा किया है.  उनसे बीजेपी हर दिन काम का हिसाब लेगी।  

भाजपा में जितनी बेचैनी है, उससे  अधिक राजद में है.  राजद  में आरोप -प्रत्यारोप का  सिलसिला तेज हो गया है.   बांकीपुर में हार  के बाद राष्ट्रीय जनता दल में  मंथन के बजाय घमासान शुरू हो गया है.  राजद  विधायक भाई वीरेंद्र और राजद  के प्रवक्ता शक्ति यादव आमने-सामने हैं.  घमासान की वजह बांकीपुर उपचुनाव में हार  ही है.  दरअसल, उपचुनाव में हार  के बाद भाई वीरेंद्र ने तेजस्वी के करीबियों पर सवाल उठाया था.  मनेर विधानसभा सीट से विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा था कि संगठन की कमजोरी की वजह से हार हुई है.  और जिन लोगों पर पार्टी भरोसा करती है, उनका जमीन पर कोई वजूद ही नहीं है.  कई ऐसे चेहरे हैं, जो हमारे नेता के अगल-बगल बैठते हैं और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करते हैं. 

 इस पर शक्ति यादव ने भाई वीरेंद्र को लेकर कह दिया था कि उन्होंने पार्टी के लिए क्या किया है? अब इस पर भाई वीरेंद्र भड़क गए हैं और शक्ति यादव को खामोश रहने की हिदायत दे दी हैं.  भाई वीरेंद्र ने कहा कि लालू प्रसाद यादव हमारे आदरणीय नेता हैं और लालू प्रसाद ने तेजस्वी यादव को ताज  दिया है.  अब हमारे नेता तेजस्वी यादव हुए.   अगर मैं पोल -पट्टी खोलने लगूं ,तो मुंह दिखाने लायक नहीं रह जाएंगें शक्ति यादव।   बता दे कि  तेजस्वी के करीबियों पर सवाल उठाने वाले विधायक भाई वीरेंद्र की बातों पर शक्ति यादव ने कहा था कि राजद विपक्ष की भूमिका में है.  सत्ता में नहीं, विपक्ष में रहते हुए पार्टी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती हैं.  नेता प्रतिपक्ष की भूमिका सदैव जनहित में रहता है.  नेता  तो अपने हिसाब से हर चीज को देखते ही हैं.  जो यह बात बोल रहा है, वह क्या कर रहा है, पार्टी के लिए उसकी भूमिका क्या है? इसके बाद तो राजद में बवाल मच गया है.