बांकीपुर परिणाम : भाजपा के लड्डू ,सम्राट चौधरी की बधाई और प्रशांत किशोर के ताबड़तोड़ हमले की क्या है राजनीति 

बांकीपुर परिणाम : भाजपा के लड्डू ,सम्राट चौधरी की बधाई और प्रशांत किशोर के ताबड़तोड़ हमले की क्या है राजनीति

टीएनपी डेस्क: बिहार के बांकीपुर में चुनाव परिणाम के पहले भाजपा कार्यालय में बने लड्डू की खूब चर्चा है. लोग पूछ रहे कि बना लड्डू बंटा नहीं तो गया कहाँ.  चर्चा इस बात  की भी है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रशांत किशोर को जीत की बधाई दिए हैं, तो प्रशांत किशोर जीतने के बाद भी सम्राट चौधरी पर हमलावर है.  वह भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का आह्वान कर रहे हैं कि चुनाव परिणाम के पीछे छिपे  संदेश को भाजपा केंद्रीय नेतृत्व समझे और बिहार में नेतृत्व परिवर्तन करें।  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की बांकेपुर सीट जितना कठिन है, इसलिए तो इस सीट को चुना गया है.  चुनाव के पहले यह  कहना था जन  सुराज  के सूत्रधार प्रशांत किशोर का.  अब तो वह उपचुनाव जीत गए हैं और बांकीपुर विधानसभा के परिणाम से वह बिहार से लेकर दिल्ली तक एक लंबी लकीर खींचने की बातें कह रहे है.  

दूसरी ओर चुनाव जीतने के बाद भी पहले की  तरह ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर हमलावर हैं.  कह  रहे हैं कि उन्हें सम्राट चौधरी से कोई निजी दुश्मनी नहीं है.  हम सिर्फ यही चाहते हैं कि बिहार में कोई समझदार, अच्छी सोच वाला मुख्यमंत्री बने.  जो कि बिहार में रोजगार ला सके, पलायन को रोक सके, शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त कर सके.  बावजूद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रशांत किशोर की  जीत पर बधाई दी है.  उन्होंने सोशल मीडिया एक्स  पर कहा है कि लोकतंत्र के महापर्व में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनता ने जनसुराज  को चुना है.  मैं जनता के इस निर्णय का सम्मान करते हुए प्रशांत किशोर जी को उनकी जीत पर हार्दिक बधाई देता हूँ. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा है कि सम्राट चौधरी से उनकी कोई निजी दुश्मनी नहीं है.  वह तो सिर्फ बिहार को सुधारने निकले हैं.  जो लोग भी बिहार को सुधारने में अपनी भूमिका निभाएंगे, सबका वह आदर और सम्मान करेंगे.

 लेकिन यह बात वह बार-बार कह रहे हैं कि बिहार की जनता को बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बता दिया है कि सम्राट चौधरी का नेतृत्व बिहार के लोगों को पसंद नहीं है.  इस बात को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भी समझना होगा।  उन्होंने कहा कि एक बार फिर इस परिणाम ने साबित कर दिया है कि किसी भी पार्टी का किला नहीं होता है.  असली मालिक तो जनता है.  जनता जब मन बना लेती है तो सब कुछ बदल जाता है.  बांकीपुर में भी यही हुआ है.  उल्लेखनीय है कि बिहार की सियासत के लिहाज से अहम मानी जाने वाली बांकीपुर सीट पर भाजपा की हार  पार्टी के लिए बड़ा झटका हैं.  यह  सीट 31 साल से भाजपा के पास थी.  इसलिए भाजपा अपना किला मान  बैठी थी.  लेकिन परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विशुद्ध रूप से शहरी क्षेत्र वाले इस विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने पार्टी को संदेश दे दिया है कि अब जातीय समीकरण मतदान का आधार नहीं होगा।  जनता को जमीन पर काम और बेहतर नेतृत्व की जरूरत है.  

वर्ष 1995 में पहली बार नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते थे.  उस समय यह  सीट  बांकीपुर के नाम से नहीं जाना जाता  था.  उसका नाम पटना पश्चिम था.  वह लगातार 2005 तक इस क्षेत्र से विधायक रहे.  उनके निधन के बाद उनके बेटे और भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहली बार 2006 में हुए उपचुनाव में विधायक बने थे.  तब से लेकर 2025 में हुए आम चुनाव तक पांच बार उन्होंने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।  लेकिन उनके सीट छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी हार मिली है.  इसके साथ ही राजद का भी गठबंधन टूट गया है.  राजद  के वोटर भी प्रशांत किशोर के ,बहुत हद तक साथ आ गए हैं.  यह अलग बात है कि चुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर की चुनौती बढ़ी है.  वह दावा कर रहे हैं कि 3 महीने के अंदर बांकीपुर में दिखने वाला परिवर्तन नजर आएगा।  साथ ही  बांकीपुर विधानसभा को आदर्श विधानसभा बनाकर  ही वह दम लेंगे और इससे फायदा यह होगा कि अन्य जनप्रतिनिधि भी अपने-अपने क्षेत्र में काम करने के लिए बाध्य होंगे, जिसका सीधा फायदा जनता को मिलेगा।