बांकीपुर उपचुनाव: प्रचार के आखिरी दिन तेजस्वी और रविशंकर प्रसाद के काफिले आमने-सामने, लगे जोरदार नारे

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के अंतिम दिन तेजस्वी यादव और रविशंकर प्रसाद के काफिले आमने-सामने आ गए. दोनों दलों के समर्थकों के बीच नारेबाजी हुई, जबकि अब 3 अगस्त को मतगणना पर सभी की नजरें टिकी हैं.

बांकीपुर उपचुनाव: प्रचार के आखिरी दिन तेजस्वी और रविशंकर प्रसाद के काफिले आमने-सामने, लगे जोरदार नारे

पटना(PATNA) : बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच गया है. मंगलवार को चुनाव प्रचार का अंतिम दिन रहा, जिसमें भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने पूरी ताकत झोंक दी. दोनों दलों के बड़े नेताओं ने रोड शो और जनसंपर्क अभियान के जरिए मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का पूरा प्रयास किया.

प्रचार के आखिरी दिन पटना की सड़कों पर एक दिलचस्प राजनीतिक नजारा देखने को मिला. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और बीजेपी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद रविशंकर प्रसाद के काफिले आमने-सामने से गुजरे. इस दौरान दोनों दलों के समर्थकों के बीच नारेबाजी भी हुई, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गर्म हो गया.

प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेजस्वी यादव के समर्थकों ने बीजेपी के खिलाफ "चंदा चोर, गद्दी छोड़" के नारे लगाए. वहीं, बीजेपी कार्यकर्ताओं ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए तेजस्वी यादव के काफिले की ओर पार्टी के पर्चे उछालकर अपना विरोध दर्ज कराया. हालांकि, मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखा और किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं होने दी.

मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है

बांकीपुर सीट पर मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है. प्रचार के अंतिम दिन दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया और मतदाताओं तक अपने संदेश पहुंचाने की पूरी कोशिश की। रोड शो में बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि चुनाव को लेकर दोनों दलों ने पूरी तैयारी कर रखी है.

आगामी राजनीतिक दिशा के लिए भी महत्वपूर्ण

अब चुनाव प्रचार थम चुका है और राजनीतिक दलों की नजरें मतदान और उसके बाद होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं. 3 अगस्त को मतगणना के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने किस उम्मीदवार पर अपना भरोसा जताया है. चुनाव परिणाम न केवल इस सीट की राजनीति बल्कि बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.