बांकीपुर उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला, किसके सिर सजेगा जीत का ताज? 30 जुलाई को फैसला

बांकीपुर उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला, किसके सिर सजेगा जीत का ताज? 30 जुलाई को फैसला

पटना (PATNA) : बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब बेहद रोचक और प्रतिष्ठा का मुकाबला बन गया है. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है. सभी प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और चुनाव प्रचार अंतिम दौर में पहुंच चुका है.

अपना पारंपरिक गढ़ बचाने की चुनौती

बीजेपी के सामने अपना पारंपरिक गढ़ बचाने की चुनौती है. पार्टी को सवर्ण, वैश्य और शहरी मतदाताओं के समर्थन पर भरोसा है. विधायक से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन अपने उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के समर्थन में लगातार क्षेत्र में प्रचार कर रहे हैं. वह बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं और लोगों से जनसंपर्क कर रहे हैं. गौरतलब है कि नितिन नवीन पांच बार और उनके पिता नवीन सिन्हा चार बार बांकीपुर से विधायक रह चुके हैं. यही वजह है कि इस सीट को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है. चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री समेत पार्टी के कई बड़े नेता भी सक्रिय हैं.

जनसभाओं के जरिए चुनावी माहौल गर्म

वहीं, आरजेडी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के रोड शो और जनसभाओं के जरिए चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है. पार्टी को यादव, मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं से उम्मीद है. तेजस्वी यादव का दावा है कि इस बार बांकीपुर में महागठबंधन जीत दर्ज करेगा.

अपनी पहली बड़ी जीत हासिल करेगा

दूसरी ओर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर इस चुनाव को अपनी राजनीतिक साख की बड़ी परीक्षा मान रहे हैं. उनका कहना है कि जनता बदलाव चाहती है और बांकीपुर से जन सुराज अपनी पहली बड़ी जीत हासिल करेगा.

मुकाबला बेहद कांटे का हो सकता है

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट पर जातीय समीकरण, शहरी वोट, मतदान प्रतिशत और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि निर्णायक भूमिका निभाएगी. यदि विपक्षी वोट बंटते हैं तो इसका लाभ बीजेपी को मिल सकता है, जबकि विपक्षी मतों का ध्रुवीकरण होने पर मुकाबला बेहद कांटे का हो सकता है.

30 जुलाई को होने वाले मतदान पर नजर

अब सबकी नजर 30 जुलाई को होने वाले मतदान पर है. परिणाम तय करेगा कि बांकीपुर में बीजेपी अपना गढ़ बचा पाती है या फिर बिहार की राजनीति में कोई नया समीकरण उभरता है.