मुजफ्फरपुर जेल में रक्षाबंधन पर भावुक नजारा, सलाखों के पीछे बंद भाइयों को बहनों ने बांधी राखी

मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय जेल में रक्षाबंधन पर भावुक नजारा देखने को मिला. बहनों ने जेल में बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, तिलक लगाया और उनकी सलामती व जल्द रिहाई की कामना की.

मुजफ्फरपुर जेल में रक्षाबंधन पर भावुक नजारा, सलाखों के पीछे बंद भाइयों को बहनों ने बांधी राखी

मुजफ्फरपुर (MUZAFFARPUR): भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास के पर्व रक्षाबंधन पर मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय जेल में भावुक तस्वीरें देखने को मिलीं. जेल में बंद अपने भाइयों से मिलने के लिए बड़ी संख्या में बहनें पहुंचीं. बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुरक्षित और स्वस्थ जीवन की कामना की. इस दौरान कई भाई-बहनों की आंखें नम हो गईं.

सुबह से जेलके बाहर लगी बहनों की कतार

रक्षाबंधन को लेकर सुबह से ही केंद्रीय जेल के मुख्य द्वार के बाहर महिलाओं की आवाजाही शुरू हो गई थी. मुजफ्फरपुर और आसपास के अलग-अलग इलाकों से आई बहनें अपने भाइयों से मिलने के लिए कतार में खड़ी नजर आईं. जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जेल प्रशासन ने उन्हें बारी-बारी से अंदर जाकर भाइयों से मिलने की अनुमति दी.

राखी बांधी,तिलक लगाया और खिलाई मिठाई

जेल परिसर में भाई के सामने पहुंचते ही बहनों के चेहरों पर खुशी के साथ भावुकता भी दिखाई दी. उन्होंने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा. इसके बाद मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की परंपरा निभाई. बहनों ने अपने भाइयों की लंबी उम्र और सलामती की प्रार्थना की. साथ ही जेल में बंद भाइयों की जल्द रिहाई की कामना भी की.

भाई को देखकर छलक पड़े आंसू 

रक्षाबंधन के इस मौके पर कई परिवारों के लिए मुलाकात बेहद भावुक रही. लंबे समय बाद भाई से मिलने पहुंची कुछ बहनें राखी बांधते हुए अपने आंसू नहीं रोक सकीं. सलाखों के बीच रक्षाबंधन मनाने का यह दृश्य भाई-बहन के रिश्ते की भावनात्मक गहराई को दर्शाता नजर आया. भाई भी अपनी बहनों से मिलकर भावुक दिखाई दिए.

जेल प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम 

रक्षाबंधन को देखते हुए शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय जेल प्रशासन की ओर से मुलाकात के लिए विशेष व्यवस्था की गई. जेल में सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों से मिलने पहुंची बहनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रवेश दिया गया. सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक-एक कर बहनों को अपने भाइयों तक पहुंचने और राखी बांधने का अवसर मिला. त्योहार के दिन जेल की दीवारों के भीतर नजर आया यह दृश्य भावनाओं से भरा रहा. परिस्थितियां भले ही भाई-बहन को सलाखों के दो ओर खड़ा कर रही थीं, लेकिन राखी के धागे ने एक बार फिर उनके रिश्ते, विश्वास और स्नेह को मजबूती से जोड़ दिया.