गोपालगंज बाइपास निर्माण को मिली मंजूरी, 12.60 किमी सड़क से शहर को मिलेगी जाम से राहत
गोपालगंज बाइपास परियोजना को बड़ी मंजूरी मिल गई है.12.60 किलोमीटर लंबे बाइपास के लिए 4.8 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग को स्टेज-1 वन स्वीकृति मिलने से निर्माण की राह आसान हुई है.
गोपालगंज (GOPALGANJ): गोपालगंज की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल बाइपास के निर्माण की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है. प्रस्तावित सड़क के लिए आवश्यक 4.8 हेक्टेयर वन भूमि के इस्तेमाल को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्टेज-1 की मंजूरी मिल गई है. यह स्वीकृति 26 शर्तों के साथ दी गई है. वन भूमि से संबंधित यह प्रक्रिया पूरी होने से परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
12.60 किलोमीटर लंबा होगा बाइपास
गोपालगंज बाइपास की कुल लंबाई 12.60 किलोमीटर प्रस्तावित है. यह एनएच-27 के दानापुर क्षेत्र को एनएच-531 के तुरकाहां से जोड़ेगा. दो लेन वाली सड़क के दोनों ओर पक्के शोल्डर का प्रावधान भी किया गया है. इसका मार्ग मांझागढ़ और देवापुर-कबिलासपुर इलाके से होकर निकलेगा. परियोजना की अनुमानित लागत 10,351.31 लाख रुपये है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक निर्माण की शुरुआत 3 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जबकि इसे 7 अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
पार्यावरण संरक्षण के लिए लागू होंगी शर्तें
वन भूमि के उपयोग की अनुमति के साथ पर्यावरण संरक्षण के उपाय भी अनिवार्य किए गए हैं. इस्तेमाल होने वाली वन भूमि के बदले समान क्षेत्रफल की गैर-वन भूमि वन विभाग को दी जाएगी. इसे सुरक्षित वन के रूप में अधिसूचित करने के साथ तय नियमों के अनुसार क्षतिपूरक पौधारोपण भी कराया जाएगा.
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जारी
बाइपास के लिए जरूरी जमीन के अधिग्रहण पर भी प्रशासन काम कर रहा है. परियोजना से संबंधित 1.73 एकड़ भूमि के भू-धारियों को धारा 21(2) के तहत नोटिस दिया जा चुका है. प्रशासन का प्रयास भू-अर्जन से जुड़ी शेष प्रक्रिया जल्द पूरी करने का है. बाइपास तैयार होने के बाद भारी और लंबी दूरी के वाहनों को गोपालगंज शहर के अंदर से गुजरने की आवश्यकता कम होगी. इससे प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव घटने, जाम से राहत मिलने और सड़क सुरक्षा बेहतर होने की संभावना है.
किसानों और स्थानीय कारोबार को भी फायदा
नई सड़क ग्रामीण तथा कृषि क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करेगी. गन्ने और दूसरे कृषि उत्पादों को बाजार तथा चीनी मिलों तक पहुंचाना आसान हो सकता है. बेहतर परिवहन सुविधा से लॉजिस्टिक्स, छोटे उद्योग, कृषि आधारित कारोबार, होटल-रेस्तरां और अन्य सेवा क्षेत्रों में नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है.