TNP DESK:भारतीय राजनीति में चुनावी रणनीतिकार के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर अब पहली बार अपनी राजनीतिक ताकत को सीधे जनता के बीच परखने जा रहे हैं. बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में उन्होंने खुद मैदान में उतरने का फैसला किया है. अब तक दूसरे नेताओं और दलों को चुनाव जिताने की रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है. खास बात यह है कि बांकीपुर विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मजबूत सीट मानी जाती है और इसे पार्टी की सिटिंग सीट भी कहा जाता है.
बांकीपुर सीट पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में मंत्री रहे नितिन नवीन के पास थी. उनके पद खाली होने के बाद अब इस सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है. ऐसे में यह मुकाबला केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नई दिशा तय करने वाला चुनाव भी माना जा रहा है. जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस सीट से चुनाव लड़ने का फैसला कर साफ कर दिया है कि अब उनकी राजनीति केवल सलाह देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह खुद जनता का जनादेश भी हासिल करना चाहते हैं.
प्रशांत किशोर का नाम भारतीय राजनीति में किसी परिचय का मोहताज नहीं है. उन्हें अक्सर देश की राजनीति का 'चाणक्य' कहा जाता है. इसकी वजह यह है कि उन्होंने कई बड़े चुनावों में ऐसी रणनीतियां तैयार कीं, जिन्होंने राजनीतिक समीकरण बदल दिए. चुनावी प्रबंधन, बूथ स्तर की योजना, मतदाताओं की नब्ज पहचानने और प्रचार अभियान को नई दिशा देने में उनकी अलग पहचान रही है.
राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में उनकी चर्चा वर्ष 2011 के आसपास शुरू हुई. इसके बाद उन्होंने कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के साथ काम किया. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव अभियान से उनका नाम प्रमुखता से जुड़ा. उस चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली और नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने. इसके बाद वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने महागठबंधन के लिए रणनीति तैयार की, जिसमें नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भाजपा को कड़ी चुनौती देते हुए सत्ता हासिल की.
इसके बाद भी प्रशांत किशोर लगातार अलग-अलग राज्यों के चुनावों में सक्रिय रहे. वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उनकी रणनीति को ममता बनर्जी की जीत का बड़ा कारण माना गया. इसी तरह पंजाब विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने चुनावी रणनीति के स्तर पर अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा, उन्होंने आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) के नेता जगन मोहन रेड्डी के लिए भी चुनावी रणनीति बनाई. उनकी रणनीति की बदौलत पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और जगन मोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बने. इन चुनावों के बाद उनकी पहचान देश के सबसे सफल चुनावी रणनीतिकारों में शामिल हो गई.
हालांकि, लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर काम करने के बाद प्रशांत किशोर ने खुद सक्रिय राजनीति में आने का फैसला किया. उन्होंने 2 अक्टूबर 2024 को अपनी राजनीतिक पार्टी जन सुराज पार्टी की औपचारिक शुरुआत की. पार्टी गठन के समय उन्होंने दावा किया कि उनका उद्देश्य बिहार की राजनीति में नई सोच, पारदर्शिता और विकास आधारित राजनीति को बढ़ावा देना है. उन्होंने वर्षों तक पूरे बिहार में पदयात्रा कर लोगों से सीधे संवाद भी किया और राज्य की समस्याओं को समझने की कोशिश की.
अब बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव उनके राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा पड़ाव माना जा रहा है. चुनावी रणनीति बनाने और चुनाव लड़ने में बड़ा अंतर होता है. रणनीतिकार के तौर पर उन्हें सफलता जरूर मिली, लेकिन अब उन्हें खुद मतदाताओं का भरोसा जीतना होगा. यही वजह है कि इस चुनाव पर पूरे बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर के राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है.
प्रशांत किशोर की व्यक्तिगत संपत्ति की बात करें तो उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति करीब 200 करोड़ रुपये के आसपास बताई जाती है. प्रशांत किशोर की कमाई का मुख्य जरिया चुनावी सलाहकार के तौर पर किया गया काम, प्रोफेशनल सेवाएं और निवेश रहे हैं. उनकी संपत्ति की सही और आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग में दिए गए चुनावी शपथपत्र से ही मानी जाएगी.
बांकीपुर सीट पर भाजपा का मजबूत जनाधार रहा है, इसलिए यह मुकाबला जन सुराज पार्टी के लिए आसान नहीं माना जा रहा. भाजपा इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखना चाहेगी, जबकि प्रशांत किशोर इसे बिहार की राजनीति में अपनी स्वीकार्यता साबित करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं. यदि वह इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करते हैं या जीत दर्ज करते हैं, तो यह जन सुराज पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश होगा. वहीं, यदि उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिलती है तो उनकी राजनीतिक रणनीति और जनाधार दोनों की परीक्षा होगी.
कुल मिलाकर, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य की पहली बड़ी परीक्षा है. अब तक दूसरों को चुनावी जीत दिलाने वाले रणनीतिकार को पहली बार खुद जनता के बीच वोट मांगना पड़ रहा है. इसलिए इस चुनाव के नतीजे न केवल बांकीपुर की राजनीति, बल्कि बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों और जन सुराज पार्टी की आगे की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

