टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बिहार में जदयू के "पावर सेंटर" के एक मजबूत सदस्य अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह के निलंबन पर पुनर्विचार हो सकता है. वह इसके लिए पार्टी फोरम में आवेदन कर सकते हैं. लेकिन इसी के साथ सवाल बड़ा हो गया है कि अगर छोटू सिंह की वापसी हुई, तो किसकी किरकिरी होगी. दरअसल, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के साथ कथित बर्ताव के बाद छोटू सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है. निष्कासन के बाद भी छोटू सिंह कहते रहे कि भले उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है, लेकिन कोई नीतीश कुमार के दिल से उन्हें बाहर नहीं कर सकता. इसे संजय झा पर अप्रत्यक्ष हमला भी माना जाने लगा.
छोटू सिंह के निष्कासन पर मंत्री अशोक चौधरी भी खुलकर सामने आये. इधर, उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने दो दिन पहले कहा था कि अगर किसी को पार्टी में वापस आना है, तो उसे आवेदन देना होगा. पार्टी का नेतृत्व इसे देखेगा. इधर, सूचना यह भी है कि छोटू सिंह की नीतीश कुमार के बेटे और मंत्री निशांत कुमार से बंद कमरे में लंबी बातचीत हुई है. छोटू सिंह के निष्कासन के बाद जदयू के प्रदेश कार्यालय में प्रदर्शन भी हुआ था. छोटू सिंह के निष्कासन के बाद जदयू "पावर सेंटर" के लोगों में खलबली देखी जा रही है. आखिर छोटू सिंह को क्यों निकाला गया, इस संबंध में बताया जाता है कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा अपने आवास पर जदयू नेताओं से 10 जुलाई की सुबह मिल रहे थे.
इसी बीच छोटू सिंह पहुंचे, कुछ बात हुई और कुछ बात बिगड़ी, दरअसल, बिहार जदयू की घोषित नई प्रदेश कमेटी में कुल 124 सदस्यों को शामिल किया गया है. 12 नेताओं को उपाध्यक्ष, 38 नेताओं को महासचिव और 74 नेताओं को सचिव पद की जिम्मेवारी दी गई है. पिछली कमेटी के मुकाबले इस बार पार्टी के पदाधिकारी की संख्या कम की गई है. पहले के कई पदाधिकारी को इस बार मौका नहीं दिया गया है. बिहार जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने 8 जुलाई को यह लिस्ट जारी किया था. जिन नेताओं का नाम कटे थे। वह संजय झा के आवास पर पहुंच गए.
एक-एक कर संजय झा सब की बात सुन रहे थे, वहीं पर अपनी नाराजगी जताने छोटू सिंह भी पहुंचे थे. उन्होंने भी नाराजगी जताई, लेकिन क्या बात हुई कि 12 घंटे के भीतर ही उन्हें 6 साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. कहा जाता है कि छोटू सिंह ने संजय झा को पार्टी छोड़ने की धमकी दी थी. पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता माना लेकिन अब परिस्थितियों बदल रही है और बहुत जल्द छोटू सिंह पुनर्विचार आवेदन कर सकते हैं और उनकी वापसी हो सकती ही. ऐसे में सवाल उठता है कि संजय झा को निश्चित रूप से यह पसंद नहीं आएगा, फिर आगे क्या होगा यह देखने वाली बात होगी.

