Bihar -UP Politics: चिराग पासवान "पंडित- पासी और पासवान" के नारे को क्यों उछाला, इसके कितने फायदे, क्या नुकसान 

Bihar -UP Politics: चिराग पासवान "पंडित- पासी और पासवान" के नारे को क्यों उछाला, इसके कितने फायदे, क्या नुकसान

tnp desk: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की फिलहाल झारखंड ,बिहार,यूपी और दिल्ली में क खूब चर्चा है.  उनके पंडित- पासी और पासवान के नारे के बाद उनके पक्ष और विपक्ष में गुणा -गणित निकालने वालों की संख्या बढ़ गई है.  उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पीडीए  यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के नारे के समानांतर चिराग पासवान ने पंडित- पासी और पासवान का नारा उछाल दिया है.  कभी अपने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का "हनुमान" कहने  वाले चिराग पासवान क्या कोई अलग लाइन खींचने की तैयारी में है? अथवा चुनाव में अधिक सीट पाने  के दबाव की राजनीति कर रहे है. 

 यह सब तो वक्त पर पता चलेगा, लेकिन चिराग पासवान के बोल अभी बदले -बदले से दिख रहे है.  बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर पर भी उन्होंने बोला, भरत तिवारी के गांव भी पहुंचे तो अयोध्या में मंदिर में चोरी कांड पर भी उन्होंने कहा कि दोषियों को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए।  चिराग पासवान ने कहा है कि पार्टी विस्तार की सोच के साथ अब उत्तर प्रदेश चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.  उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ने की बात उन्होंने हाजीपुर में कही है.  उन्होंने कहा कि हम समावेश की सोच के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं.   जब मैं बिहार में बिहार फर्स्ट ,बिहारी फर्स्ट और 14 करोड़ बिहारी की बात करता हूं, तो विपक्ष के कुछ दल  जातियों में बांटकर  और पीडीए  की बात कर अलग-अलग वर्ग और समुदाय में लोगों को बांटने का काम करते हैं.  हमारी सोच "ए टू जेड " को साथ लेकर चलने की है. 

 उनका मानना है कि अनुसूचित जाति के साथ आज भी कई जगह भेदभाव और उत्पीड़न के उदाहरण देखने को मिलते हैं, लेकिन सिर्फ अनुसूचित जाति  ही नहीं, ऊंची जाति के लोग भी उत्पीड़न के शिकार होते है.  भरत तिवारी एनकाउंटर का उन्होंने उदाहरण भी दिया।  उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत उन्होंने उत्तर प्रदेश में पंडित -पासी -पासवान का फार्मूला दिया है.  चिराग पासवान का यह भी कहना है कि उनकी पार्टी पंजाब और उत्तराखंड में भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. 

 दरअसल, 2027 में उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रस्तावित है और इस चुनाव के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है.  अखिलेश यादव ने पहले ही पीडीए  का नारा दिया था तो उसके जवाब में चिराग पासवान ने पंडित- पासी और पासवान का नारा बुलंद किया है.  राजनीतिक पंडितों का मानना है कि चिराग पासवान उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव नहीं लड़ेंगे, इसके पीछे कई वजह हैं.  वह फिलहाल एनडीए में है और एनडीए  से बाहर रहना नहीं चाहेंगे, दूसरी ओर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जिस तरह उन्होंने अधिक सीट लेने की जमीन तैयार की थी , वही प्रयास  उत्तर प्रदेश में भी हो सकता है.  वैसे भी उत्तर प्रदेश का चुनाव भाजपा के लिए नाक की लड़ाई होगी।  यूपी  में चिराग पासवान अकेले चुनाव में जाएंगे, इसमें संदेह होना बहुत स्वाभाविक है.