Bihar Politics: छात्रों से मुलाकात के बाद चिराग का बड़ा फैसला, 33 राज्यों में संगठन बदला, अब आगे क्या

बिहार की राजनीति में संगठनात्मक बदलाव और नेताओं की बढ़ती सक्रियता ने सियासी हलचल तेज कर दी है. चिराग पासवान के नेतृत्व में LJP ने कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष बदले हैं, वहीं नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर भी अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं.

Bihar Politics: छात्रों से मुलाकात के बाद चिराग का बड़ा फैसला, 33 राज्यों में संगठन बदला, अब आगे क्या

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बिहार की राजनीति में चिराग पासवान एक बार फिर चर्चा में हैं. मंगलवार को उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से मुलाकात की. फिर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी भेंट की. छात्रों से मिलने के बाद उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार तक उनकी मांग पहुंचाएंगे, उन्होंने मीडिया से कहा कि जिस तरीके से छात्रों का संघर्ष देखने को मिला, इसे मेरी चिंताएं बढ़ गई है. जब मैं आया हूं, इस सोच के साथ आया हूं कि उनके विषयों को लेकर हम लोग बैठकर, जो भी समाधान हो, उस दिशा में आगे बढ़ाया जाए. छात्रों से मुलाकात के बाद चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी मुलाकात की. ठीक इसके दूसरे दिन उन्होंने अपनी पूरी टीम को ही बदल दिया. 

इसके बाद राजनीतिक माने निकाले जाने लगे. कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले इस कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है. इस बदलाव को कई राज्यों के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. बिहार सहित 33 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष को बदल दिया गया है. सुरेंद्र विवेक को बिहार, विधायक जनार्दन पासवान को झारखंड, जितेंद्र कुमार गुप्ता को ओडिशा  का अध्यक्ष बनाया गया है. बिहार प्रदेश अध्यक्ष पद से राजू तिवारी की छुट्टी कर दी गई है. सुरेंद्र विवेक भूमिहार समाज से आते है. वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी को राष्ट्रीय कार्य समिति में महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है. 

देश के आठ राज्यों में आने वाले वक्त में चुनाव होने वाले हैं. माना जा रहा है, इसी  में ध्यान रखते हुए चिराग पासवान की पार्टी में बदलाव किया गया है. दरअसल, उत्तर प्रदेश में भी अगले साल चुनाव होने जा रहे हैं और पहले से ही चिराग पासवान की पार्टी ने घोषणा कर रखी है कि वह उत्तर प्रदेश में लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी. ऐसे में पार्टी के पुनर्गठन को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. वैसे भी बिहार का राजनीतिक माहौल अब  बदला बदला सा दिख रहा है. सभी पार्टियों नए ढंग से संगठन के पुनर्गठन में लगी हुई हैं. अब तो पुख्ता ढंग से कहा जा सकता है कि बिहार की राजनीति बदल रही है. 

सम्राट चौधरी सरकार पर भी दबाव है, बिहार की राजनीति से लगभग "आउट" हुए नीतीश कुमार फिर से "इन "करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. वह लगातार सप्ताह में तीन-चार दिन पार्टी दफ्तर पहुंच रहे हैं. कार्यकर्ताओं से सीधे मिल रहे हैं. अभी तक ठंठा पड़ी जदयू और राजद जैसी पार्टियों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है. बिहार के राजनीतिक गलियारों में तेज हलचल दिख रही है. सभी दल अपने कार्यकर्ताओं और बूथ की संरचना को ठोस करने में जुट गए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मोर्चा संभाल लिए हैं. दूसरी ओर तेजस्वी यादव और अन्य दल भी अपने कैडर को एकजुट करने में सक्रिय हो गए हैं. 

कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर की राजनीति ने बिहार में पार्टियों  को अपनी रणनीति बदलने को मजबूत कर दिया है. प्रशांत किशोर ने सितंबर महीने में बिहार के सभी जिलों में यात्रा करने का निर्णय लिया है, तो अक्टूबर महीने से पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी यात्रा पर निकलेंगे, मतलब दोनों नेता बिहार के 38 जिलों में  उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी, जीतन राम मांझी की पार्टी अपने समर्थकों को गोलबंद करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है., जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ने प्रदेश कमेटी, जिला अध्यक्षों की नई सूची जारी कर दी है.

प्रदेश कमेटी में 18 प्रदेश उपाध्यक्ष, 38 प्रदेश महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, 27 सचिव, दो मीडिया प्रभारी,16 प्रदेश कार्य समिति सदस्यों की सूची जारी की गई है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिहार में क्या बदलाव की नई पटकथा लिखी जा रही है? तो बांकीपुर सीट से प्रशांत किशोर उपचुनाव जीतने के बाद लगातार सक्रिय हैं. वह दावा कर रहे हैं कि बहुत जल्द बांकीपुर विधानसभा को आदर्श विधानसभा बनाकर लोगों के सामने उदाहरण पेश करेंगें. इस दिशा में वह सक्रिय भी देखे जा रहे हैं.