भागलपुर: 28 अगस्त की रात से विक्रमशिला सेतु पर थमेंगे वाहन, गंगा के रास्ते होगा आवागमन
भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर 28 अगस्त की मध्य रात्रि से आवागमन बंद रहेगा. यात्रियों के लिए जलमार्ग को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है, लेकिन इसका संचालन गंगा के जलस्तर पर निर्भर करेगा.
भागलपुर (BHAGALPUR): बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु पर 28 अगस्त की मध्य रात्रि से वाहनों का आवागमन बंद कर दिया जाएगा. सेतु पर यातायात बंद होने के बाद आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए जिला प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर रहा है. प्रशासन की योजना के मुताबिक गंगा के जलमार्ग का इस्तेमाल लोगों को एक ओर से दूसरी ओर पहुंचाने के लिए किया जाएगा. विक्रमशिला सेतु भागलपुर और गंगा के उत्तर क्षेत्र के बीच आवागमन का प्रमुख माध्यम है. ऐसे में पुल पर यातायात बंद होने के दौरान बड़ी संख्या में यात्रियों को वैकल्पिक साधनों की आवश्यकता होगी.
बड़े जहाजों के परिचालन की तैयारी
भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय के मुताबिक, जलमार्ग से यात्रियों की आवाजाही के लिए मुख्य रूप से बड़े जहाजों का परिचालन कराने की तैयारी है. इसका उद्देश्य एक बार में अधिक यात्रियों को सुरक्षित तरीके से गंगा पार कराना और पुल बंद होने से होने वाली परेशानी को कम करना है.जिला प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था के साथ सुरक्षा पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दे रहा है. जलमार्ग का संचालन गंगा की परिस्थितियों और जलस्तर को ध्यान में रखकर किया जाएगा.
गंगा के जलस्तर पर रहेगी नजर
मानसून के दौरान गंगा के जलस्तर में बदलाव को देखते हुए प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी करेगा. जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नदी का जलस्तर डेंजर लेवल से ऊपर जाने की स्थिति में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी. ऐसी परिस्थिति में नावों और अन्य जल परिवहन साधनों के परिचालन को रोका जा सकता है. यानी जलमार्ग की सुविधा पूरी तरह नदी के जलस्तर और उस समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी.
यात्रियों की सुरक्षा रहेगी प्राथमिकता
विक्रमशिला सेतु बंद होने के दौरान प्रशासन के सामने यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन उपलब्ध कराने के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी चुनौती रहेगी. इसी को देखते हुए बड़ी क्षमता वाले जहाजों के इस्तेमाल की योजना बनाई गई है.प्रशासन का प्रयास है कि पुल पर यातायात बंद रहने के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े. हालांकि, गंगा का जलस्तर बढ़ने पर जल परिवहन से जुड़े फैसले सुरक्षा मानकों के आधार पर लिए जाएंगे.