जय हो बाबा! कांवरिया पथ पर देखने को मिली अनोखी तस्वीर, रावण को बाबा बैद्यनाथ से मिलाने निकले भक्त
सावन में कांवरिया पथ पर भक्ति की अनोखी तस्वीर देखने को मिली. पश्चिम बंगाल के श्रद्धालु रावण की प्रतिमा को कांवर पर बिठाकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकले हैं. 150 किलो से अधिक वजन वाली इस कांवर को लेकर भक्त रावण को बाबा बैद्यनाथ से मिलाने देवघर जा रहे हैं.
भागलपुर (BHAGALPUR):देवों के देव महादेव, भोलेनाथ और शंकर को कई नामों से पुकारा जाता है. भगवान भोलेनाथ ने जब-जब लीला रची, उनके अलग-अलग नाम रखे गए. भगवान भोलेनाथ को एक तरफ जहां सृष्टि का रचयिता कहा जाता है, तो वहीं दूसरी तरफ वह औघरदानी भी हैं. वह काफी मस्त-मौला रहते हैं. वहीं, भोले भक्तों की बात करें तो वे भी बाबा भोलेनाथ की तरह अपनी मस्ती में मग्न रहते हैं.बात अगर भोलेनाथ के भक्तों की हो, तो रावण का जिक्र जरूर होता है, क्योंकि रावण के जैसा भोले का महान भक्त आज तक नहीं हुआ. दरअसल, आज हम भोले के सबसे महान भक्त रावण के बारे में सिर्फ इसलिए बात कर रहे हैं, क्योंकि सावन के महीने में रोजाना लाखों भक्त गंगाजल भरकर देवघर पहुंच रहे हैं. लोग अपनी-अपनी भक्ति के अनुसार भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं, लेकिन सावन के महीने में कांवरियों के जाने वाले रास्ते में एक से एक अद्भुत भोले के भक्त और कांवरिया दिखाई देते हैं, जो अपने आप में काफी खास हैं.
रावण को बाबा बैद्यनाथ से मिलाने निकले भक्त
आज हम आपको ऐसे ही अद्भुत कांवरियों के बारे में बताने वाले हैं, जो रावण को अपने कंधे पर बिठाकर देवघर ले जा रहे हैं. सावन के पावन महीने में अजगैबीनाथ गंगा धाम, सुल्तानगंज से झारखंड के बाबाधाम तक जाने वाले कच्ची कांवरिया पथ पर भोलेनाथ के अनोखे और अनूठे भक्त नजर आ रहे हैं. कोई भोलेनाथ को कांवर में बैठाकर देवघर ले जा रहा है, तो कोई बाबा को ही अपने कंधों पर बैठाकर यात्रा कर रहा है. इसी बीच पश्चिम बंगाल से आए श्रद्धालुओं का एक झुंड लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.ये श्रद्धालु भगवान शिव के सबसे बड़े भक्तों में गिने जाने वाले प्रकांड विद्वान और ज्ञानी रावण की प्रतिमा को कांवर पर बिठाकर अजगैबीनाथ गंगा धाम से बाबाधाम की 105 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा पर निकले हैं.श्रद्धालुओं का कहना है कि वे भोलेनाथ के सबसे बड़े भक्त रावण को उनके आराध्य बाबा बैद्यनाथ से मिलाने के लिए गंगा धाम से बाबाधाम लेकर जा रहे हैं. खास बात यह है कि इस कांवर का वजन डेढ़ सौ किलो से भी अधिक है.

इतना भारी वजन होने के बावजूद श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह
इतना भारी वजन होने के बावजूद श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है. श्रद्धालुओं का कहना है कि कांवर का वजन जरूर ज्यादा है, लेकिन जब भोलेनाथ का आशीर्वाद साथ हो, तो कोई परेशानी महसूस नहीं होती. उनका विश्वास है कि महादेव की भक्ति में उठाया गया हर कदम उन्हें बाबाधाम तक जरूर पहुंचाएगा.सावन के महीने में सुल्तानगंज से देवघर तक का पूरा कच्ची कांवरिया पथ शिवभक्तों की आस्था से सराबोर नजर आता है. देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए इस कठिन यात्रा पर निकलते हैं. इसी यात्रा के दौरान अलग-अलग तरह की कांवर और भक्ति के अनोखे रूप देखने को मिलते हैं.पश्चिम बंगाल से आए इन श्रद्धालुओं की यह अनोखी कांवर यात्रा भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. रावण की प्रतिमा को कांवर पर बिठाकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करना उनके लिए सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी आस्था और भक्ति का प्रतीक है.

रास्ते में लोगों का प्यार और उत्साह भी मिल रहा है
श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें रास्ते में लोगों का प्यार और उत्साह भी मिल रहा है. कांवर का वजन भले ही डेढ़ सौ किलो से अधिक हो, लेकिन महादेव पर उनकी आस्था इतनी मजबूत है कि उन्हें यह भार भी भारी नहीं लग रहा. उनका मानना है कि जब बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद साथ हो, तो कोई भी कठिन रास्ता आसान हो जाता है और भक्ति में उठाया गया हर कदम उन्हें उनके आराध्य तक पहुंचाता है.