बेगूसराय में दिवंगत शिक्षक को जारी हुआ नोटिस, जुलाई में निधन अक्टूबर में प्रशिक्षण में नहीं हुए शामिल

बेगूसराय में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. जुलाई में शिक्षक के निधन के तीन महीने बाद भी ई शिक्षाकोष पोर्टल पर नहीं हुआ अपडेट. अब प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है

बेगूसराय में दिवंगत शिक्षक को जारी हुआ नोटिस, जुलाई में निधन अक्टूबर में प्रशिक्षण में नहीं हुए शामिल

बेगूसराय: बिहार का शिक्षा विभाग अक्सर अपने कारनामे की वजह से चर्चा में बनी रहती है. एक बार फिर ऐसा ही एक मामला बेगूसराय से सामने आया है जहां करीब 3 महीने पहले मृत शिक्षक का नाम अब तक रिकॉर्ड से नहीं हटाया गया है. विभाग ने शिक्षक को प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने का कारण पूछने के लिए नोटिस जारी किया है. यह मामला सामने आने के बाद अब सवाल उठने लगा है कि जिस शिक्षक का तीन महीने पहले निधन हो गया उनका नाम प्रशिक्षण के दौरान अनुपस्थित शिक्षकों की सूची में कैसे आ गया.

मामला बेगूसराय के टीचर ट्रेनिंग कॉलेज का है जहां बीते 12 से 16 अक्टूबर तक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया था. इस प्रशिक्षण में जिले के कई शिक्षक अनुपस्थित रहे थे जिसे अब विभाग की तरफ से कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है. यह नोटिस गढ़पुरा के आदर्श मध्य विद्यालय के दिवंगत पूर्व प्रधानाध्यापक रामानुज शर्मा का नाम भी शामिल है जबकि उनका निधन 21 जुलाई को हो गया था. जानकारी के अनुसार, दिवंगत शिक्षक रामानुज शर्मा बेगूसराय जिले के गढ़पुरा प्रखंड की दुनही पंचायत स्थित मणिपुर गांव के निवासी थे. वे राजकीयकृत आदर्श मध्य विद्यालय, गढ़पुरा में प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे. 21 जुलाई को उनके निधन के बाद इसकी सूचना जिला शिक्षा कार्यालय को दे दी गयी थी. इसके बावजूद करीब तीन महीने बाद जारी प्रशिक्षण संबंधी पत्र में उनका नाम शामिल कर लिया गया.

विभाग की ओर से उन्हें प्रशिक्षण में अनुपस्थित मानते हुए स्पष्टीकरण मांगने वाले शिक्षकों की सूची में रखा गया. इस घटना ने विभागीय रिकॉर्ड को समय पर अपडेट करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिये हैं. इस मामले में गढ़पुरा प्रखंड के प्रभारी शिक्षा पदाधिकारी गोविंद कुमार ने बताया कि शिक्षक रामानुज शर्मा के निधन की सूचना समय पर जिला शिक्षा कार्यालय को दे दी गयी थी. उन्होंने कहा कि ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर संबंधित डेटा अपडेट नहीं होने के कारण इस तरह की समस्या सामने आती है.

शिक्षकों की सेवा संबंधी जानकारी, उपस्थिति और प्रशिक्षण से जुड़े रिकॉर्ड के प्रबंधन के लिए डिजिटल पोर्टल का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में निधन की सूचना विभाग को दिए जाने के बावजूद शिक्षक का नाम विभागीय रिकॉर्ड में बने रहना डेटा अपडेट करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है. रिकॉर्ड समय पर दुरुस्त नहीं होने से विभागीय आदेशों में इस तरह की त्रुटियां सामने आ रही हैं. अब सवाल यह है कि जब शिक्षक के निधन की सूचना पहले ही जिला शिक्षा कार्यालय को दे दी गयी थी, तो उनका नाम अनुपस्थित शिक्षकों की सूची में कैसे शामिल हो गया. साथ ही, विभागीय रिकॉर्ड में सुधार करने और भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाये जाएंगे.