बेगूसराय (BEGUSARAI): बिहार के बेगूसराय जिले के अनुमंडलीय अस्पताल, मंझौल में सड़क हादसे में घायल मरीज के पैर में गत्ते/कार्टून लगाए जाने के मामले में जिला प्रशासन ने जांच के बाद कार्रवाई की है. घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने 6 अगस्त 2026 को अस्पताल पहुंचकर पूरे मामले की जांच की. इस दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर, अस्पताल प्रबंधक और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से घटना को लेकर जानकारी ली गई.
15 जुलाई को सड़क हादसे में घायल हुआ था मरीज
जांच में सामने आया कि 15 जुलाई 2026 को सड़क दुर्घटना में घायल कृष्ण कुमार को इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल, मंझौल लाया गया था. अस्पताल में उनका प्राथमिक उपचार किया गया. इसके बाद जरूरी जांच के लिए एक्स-रे कराने की सलाह दी गई. हालांकि, रात के समय अस्पताल में एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध नहीं थी. इसके चलते मरीज को आगे के इलाज और जांच के लिए सदर अस्पताल, बेगूसराय रेफर कर दिया गया.
Splint नहीं मिला तो गत्ते से पैर किया स्थिर
जांच के दौरान अस्पताल की ओर से बताया गया कि उस समय मरीज के पैर को स्थिर रखने के लिए अस्पताल में Splint उपलब्ध नहीं था. आपात स्थिति में पैर को स्थिर रखने के उद्देश्य से उपलब्ध गत्ते/कार्टून का इस्तेमाल किया गया. जांच रिपोर्ट में इसे तत्काल स्थिति में किया गया प्रयास माना गया है, लेकिन प्रशासन ने साफ किया कि गत्ते या कार्टून का इस्तेमाल मानक चिकित्सीय प्रक्रिया का विकल्प नहीं है. अस्पताल प्रबंधन को भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए जरूरी चिकित्सा सामग्री उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं.
डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति खत्म, मांगा गया स्पष्टीकरण
मामले में कार्रवाई करते हुए रेफरल अस्पताल, मंझौल में प्रतिनियुक्त चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिनव प्रियदर्शी की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है. उन्हें अपने मूल पदस्थापन अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रामपुर बसवन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मटिहानी में योगदान देने का निर्देश दिया गया है. इसके साथ ही डॉक्टर से कथित लापरवाही को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है.
स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई जांच रिपोर्ट
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मानक के अनुसार इलाज उपलब्ध कराने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मामले की जांच रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार, पटना को भेज दी गई है. प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को चिकित्सा सुविधाओं और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि भविष्य में किसी मरीज को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े.

