बांकीपुर सीट: केबी सहाय, महामाया बाबू को मुख्यमंत्री बनाने वाली यह सीट इस बार किसको चुनेगी? क्या बैठ रहा गणित 

बांकीपुर सीट: केबी सहाय, महामाया बाबू को मुख्यमंत्री बनाने वाली यह सीट इस बार किसको चुनेगी? क्या बैठ रहा गणित

tnp desk:  बिहार का बांकीपुर उपचुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है.  सेवादार और सलाहकार के बीच लड़ाई तेज हो गई है. राजद भी किस्मत आजमा रहा है.  भाजपा का कहना है कि प्रशांत किशोर सलाहकार है.  बांकीपुर की जनता को सेवादार की जरूरत है.  भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिंह ने जनसभाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह किसी राजनीतिक प्रयोग या किसी व्यक्ति की महत्वाकांक्षा का नहीं, बल्कि बांकीपुर  के विकास और जनता के विश्वास का चुनाव है.  बांकीपुर को सलाहकार नहीं, सेवादार की जरूरत है.  आरोप लगाया गया कि प्रशांत किशोर वर्षों -वर्ष तक दूसरों को चुनाव जिताने  की रणनीति बनाते रहे.   अब बांकीपुर  को अपनी राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने की कोशिश कर रहे है.  लेकिन बांकीपुर  की जनता किसी सलाहकार के प्रयोग का हिस्सा नहीं बनेगी। 

 वाकपटुता  में माहिर प्रशांत किशोर भी लगाया है जोर 
 
दूसरी ओर प्रशांत किशोर भी भाजपा के हर चुनावी वार  की काट  तैयार रखे है.  वाकपटुता  में माहिर प्रशांत किशोर भाजपा के हर आरोपों  का  जवाब दे रहे है.  उन्होंने कुत्ता -बिल्ली शब्द को तो जैसे रट  लिया है.  इस बीच प्रशांत किशोर छात्र आंदोलन को चुनावी मुद्दा बनाने में जुटे हैं.  उनका कहना है कि छात्रों पर जो लाठियां चली है, उसकी निंदा करते है ।  यह  तो अभी शुरुआती दौर है.  अभी छात्रों को डराया जाएगा, पीटा  जाएगा लेकिन यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है.  प्रशांत किशोर लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं और भाजपा को चुनौती दे रहे है. 

पटना ज़िले के 14 विधानसभा क्षेत्र में एक है बांकीपुर

बता दें कि  बांकीपुर विधानसभा सीट पटना जिले की 14 विधानसभा सीटों में से एक है.  पटना का  कदम कुआं ,राजेंद्र नगर, गर्दनीबाग, सचिवालय, बोरिंग रोड, मीठापुर, गांधी मैदान सहित कई महत्वपूर्ण मोहल्ले इस विधानसभा क्षेत्र में आते है.  कायस्थ बहुल  मानी जाने वाली इस  सीट  में लगभग पौने चार लाख  मतदाता है.  1995 से इस सीट पर बीजेपी  रही है.  उस समय यह   पटना पश्चिम कहलाती थी.  साल 2008 में परिसीमन के बाद यह सीट बांकीपुर कहीं जाने लगी.  1995 में यहां से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा  ने  जीत हासिल की थी. 

किन -किन बड़े नामों का निजी आवास है इस विधानसभा क्षेत्र में 
 
2005 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद नवीन किशोर सिन्हा  का निधन हो गया.  उसके बाद नितिन नवीन अपनी राजनीतिक पारी बांकीपुर  से शुरू की.  2025 तक नितिन नवीन इस सीट से जीतते  रहे.  2025 में उन्होंने राजद को 51000 वोटो से हराया था.  पटना पश्चिम (अब बकीपुर )से 1962 में कृष्ण बल्लभ सहाय और 1967 में  महामाया प्रसाद सिंह जीते थे.  यह  दोनों पटना पश्चिम(अब बांकीपुर ) से विधायक बनने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री बने थे.  इसी विधानसभा क्षेत्र में शत्रुघ्न सिन्हा, शेखर सुमन, सुशील कुमार मोदी, शारदा सिन्हा, रविशंकर प्रसाद, राजीव प्रताप रूढ़ी, सत्येंद्र नारायण सिंह के भी निजी आवास है. सत्येंद्र नारायण सिंह, सुशील कुमार मोदी और शारदा सिन्हा दिवंगत हो गए है.