TNP DESK- पश्चिम बंगाल से एक बड़ी खबर सामने आई है. तृणमूल "सुप्रीमो" ममता बनर्जी पूरी तरह से एक्शन के मूड में दिख रही हैं. चुनाव में करारी हार के बावजूद उनके आक्रामक तेवर जारी है. रविवार को बैठक में केवल 20 विधायक पहुंचने के मामले को ममता बनर्जी ने गंभीरता से लिया है. और विधायकों को कड़ा संदेश दिया है. दूसरी ओर पार्टी के भीतर "विभीषण" की भूमिका निभाने वाले विधायकों के खिलाफ एक्शन भी तेज कर दिया है. जानकारी के अनुसार तृणमूल कांग्रेस ने अपने दो विधायक सांदीपन साहा और रितब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित कर दिया है.
पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का भी है आरोप
जानकारी के अनुसार दोनों के खिलाफ कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया है. हालांकि यह एक्शन मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी की प्रेस कांफ्रेंस के कुछ मिनट बाद ही लिया गया है. लोग बताते हैं कि मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने खुलासा किया था कि विधानसभा सचिवालय को शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने के लिए दिए गए पत्र में विधायकों के जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल हुआ था. उसकी शिकायत तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों ने ही की थी. इसके बाद तत्काल प्रभाव से दोनों को निष्कासित कर दिया गया है. उनके निष्कासन की मुख्य वजह तो यही बताई जा रही है, लेकिन और भी कारण गिनाये जा रहे है.
विधायकों के जाली हस्ताक्षर मामले की हो रही जाँच
आपको बता दें कि विधायकों के जाली हस्ताक्षर के उपयोग के मामले की जांच सीआईडी कर रही है. इसी मामले में सांसद अभिषेक बनर्जी को नोटिस जारी किया गया है. लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वह पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे। राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि ममता बनर्जी ने कड़ा संदेश देने की कोशिश की है. हालांकि उनकी यह कोशिश उल्टा भी पड़ सकती है, क्योंकि निष्कासित विधायक अब खुलकर सुभेंदु अधिकारी के समर्थन में आ सकते हैं. तृणमूल कांग्रेस के भीतर सुलग रही आग और तेज भी हो सकती है. सूत्रों के अनुसार निष्कासन पत्र में लिखा गया है कि तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद दोनों विधायक नेतृत्व द्वारा बुलाई गई बैठकों से बार-बार अनुपस्थित रहे. यह भी आरोप है कि दोनों विधायकों के बयान और उनकी गतिविधियां तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रही थी. जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.