सरकारी कर्मचारी ध्यान दें! नौकरी लगते ही कर दें राशन कार्ड सरेंडर, नहीं तो पड़ जाएगा महंगा, पढ़ें कैसे

सरकारी कर्मचारी ध्यान दें! नौकरी लगते ही कर दें राशन कार्ड सरेंडर, नहीं तो पड़ जाएगा महंगा, पढ़ें कैसे

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देश के ऐसे परिवार, जो गरीबी रेखा के नीचे आते हैं, उन्हें हर महीने सरकार की ओर से मुफ्त राशन योजना के तहत राशन दिया जाता है, ताकि उनके परिवार का भरण-पोषण हो सके. हालांकि, इसे लेकर सरकार की ओर से कई कड़े निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि केवल सही लाभुकों को ही इस योजना का लाभ मिल सके और फर्जी लाभुक इसका फायदा न उठा सकें. हालांकि, कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो पूरी तरह से संपन्न होने के बावजूद राशन योजना का लाभ उठाते हैं. खासकर ऐसे लोग, जिनके घर में कोई सरकारी नौकरी करता है, फिर भी वे राशन कार्ड योजना का लाभ ले रहे हैं. ऐसे लोगों को अब सावधान होने की जरूरत है और यह खबर ध्यान से पढ़नी चाहिए, वरना फ्री में राशन लेना महंगा पड़ सकता है.

 नौकरी लगते ही कर दें राशन कार्ड सरेंडर, नहीं तो पड़ जाएगा महंगा

यदि आपकी सरकारी नौकरी लग चुकी है और इसके बावजूद आप राशन कार्ड योजना का लाभ ले रहे हैं, तो अब आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. साथ ही राशन कार्ड धारकों को भुगतान भी करना होगा. यानी अब तक आपने जितना भी मुफ्त राशन लिया है, उसकी कीमत भी चुकानी पड़ सकती है.दरअसल, झारखंड की राजधानी रांची में जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अपात्र और गलत तरीके से राशन लेने वाले लाभुकों के खिलाफ सख्ती शुरू कर दी है. ऐसे अपात्र कार्डधारकों को नोटिस जारी कर अनाज की राशि वापस जमा करने का निर्देश दिया गया है. यदि ये फर्जी लाभुक अनाज की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.

रांची जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की

रांची जिला प्रशासन ने जब फर्जी लाभुकों की जांच शुरू की, तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए, जिसने अधिकारियों के होश उड़ा दिए. जांच में पता चला कि कई ऐसे लोग हैं, जो वर्षों से सरकारी नौकरी कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर गरीबों के अनाज पर हक मारते हुए राशन योजना का लाभ भी गलत तरीके से उठा रहे हैं. ऐसा ही एक मामला रेलवे कर्मचारी का सामने आया, जो पिछले 9 वर्षों से सरकारी सेवा में है, लेकिन इसके बावजूद राशन कार्ड योजना का लाभ भी ले रहा था. वहीं, जब प्रशासन ने सख्ती दिखाई, तो परिवार और लाभुक की ओर से बेहद हैरान करने वाला जवाब दिया गया. उनका कहना था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद राशन कार्ड सरेंडर करना होता है.

काई सरकारी नौकरी करने वाले भी ले रहे थे योजना का लाभ

रेलवे कर्मचारी के साथ एक सरकारी टीचर भी फर्जी लाभुक के रूप में सामने आयी, जो पिछले 10 वर्षों से सरकारी नौकरी कर रही है, लेकिन हर महीने मुफ्त राशन भी ले रही थी. उसने भी यही जवाब दिया कि उसे इस नियम की जानकारी नहीं थी कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद राशन कार्ड सरेंडर करना होता है. उनका कहना था कि जानकारी के अभाव में उन्होंने राशन कार्ड बंद नहीं कराया. वहीं, प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जैसे ही आपकी आर्थिक स्थिति बदलती है या सरकारी नौकरी मिलती है, आपको अपना राशन कार्ड सरकार को सरेंडर करना होता है. यह लाभुक की जिम्मेदारी है. ऐसा नहीं करने पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले लाभ के लिए वह पात्र नहीं रहता और गलत तरीके से लाभ लेने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाती है.

झारखंड सरकार में अब फर्जी लाभुकों पर शिकंजा कसने की तैयारी में 

आपको बता दें कि अब झारखंड में सरकार पात्र और अपात्र राशन कार्ड लाभुकों की पहचान के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है. पात्र लाभुकों की पहचान के लिए जिला प्रशासन की ओर से केपीआई (KPI) यानी परफॉर्मेंस इंडिकेटर और आधार सत्यापन कराया गया. इसमें केवल राशन कार्ड का सत्यापन ही नहीं होता, बल्कि आपकी आय, परिवार की आर्थिक स्थिति, घर में दोपहिया या चारपहिया वाहन, आपके पास कितनी जमीन है, जीएसटी और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जुड़े डेटा का भी मिलान किया जाता है. इस जांच में बड़ी संख्या में ऐसे अपात्र लाभुक सामने आए हैं, जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद गरीबों के हक का राशन ले रहे थे.

सत्यापन के बाद थमाया नोटिस

जिला प्रशासन ने ऐसे लोगों के सत्यापन के बाद नोटिस जारी कर दिया है और सरकारी खजाने में राशि जमा करने का निर्देश दिया है. कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें वसूली की राशि हजारों रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक है. अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला या तय समय में राशि जमा नहीं की गई, तो वसूली के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी और एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. नोटिस मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग अब रांची समाहरणालय और जिला आपूर्ति कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं. लोगों का कहना है कि नियमों की जानकारी नहीं होने की वजह से उनसे यह गलती हुई, लेकिन प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी.