चाईबासा(CHAIBASA):एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग के व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है.इस बार बच्चे का शव डब्बे में भर कर ले जाया गया जिससे फिर एक बार मानवता की हद पार हो गई जिससे जिला शर्मशार हो गया है.पश्चिमी सिंहभूम में जहाँ खनिज संपदा की चमक है, वही आज मानवता धुंधली पड़ गई. चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में जो हुआ, वह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, पूरे सिस्टम की चरमराती तस्वीर है.यहाँ एक नवजात की मौत के बाद पिता को शव को डिब्बे में रख-बाँहों में भर लेकर जाने को मजबूर होना पड़ा यहां कोई शव-वाहन नहीं, कोई सम्मान-पूर्ण व्यवस्था नहीं.
पढ़े क्या है परिजनों का आरोप
परिजनों का आरोप है कि नवजात की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें जल्द से जल्द शव ले जाने को कहा और ना ही कोई वाहन की व्यवस्था की और ना ही और कुछ, अस्पताल प्रबंधन कहता रहा कि आप जल्द से जल्द सबको ले जाए मजबूरन पिता ने अपने नवजात शिशु केशव को एक कार्डबोर्ड के डिब्बे में रखकर ई रिक्शा की सवारी कर बंदगांव प्रखंड के नकटी गांव पहुंचना पड़ा.जबकी राज्य के आँकड़े बताते है ग्रामीण अनुमंडल अस्पतालों में विशेषज्ञ- डॉक्टर 40% से अधिक पद खाली, नवजात-इंटेन्सिव केयर न्यून. यह घटना उसी खाई की गूँज है लेकिन सवाल सबसे बड़ा कि कब तक माँ-बाप ‘डिब्बे’ को अंतिम सहारा मानेंगे? यह होली के रंग नहीं, बल्कि व्यवस्था का वह धब्बा है जिसे मिटाना ज़रूरी है.
चार वर्ष के बच्चे की मौत हुई थी
ज्ञात हो की कुछ माह पहले ही जगन्नाथपुर अनुमंडल के नोवामुण्डी प्रखंड के बड़ापासिया स्थित गांव में एक चार वर्ष के बच्चे की मौत ईलाज के दौरान सदर अस्पताल चाईबासा में हो गई थी उस बच्चें का शव झोले में भढ़ कर कारवां बस से लाया गया था.
रिपोर्ट-संतोष वर्मा
Thenewspost - Jharkhand
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