Bihar Politics : बिहार में "नीतीश मॉडल " ही काम करेगा या आगे बदलेगा काम का तरीका ,क्यों छिड़ गई है बड़ी बहस !

    बिहार में अभी एक तरह से "कार्य मॉडल" को लेकर   वैचारिक जंग छिड़ी हुई है.  बिहार में आगे नीतीश मॉडल काम करेगा या यह मॉडल बदलेगा या फिर गृह मंत्री सम्राट चौधरी जिस  मॉडल पर काम कर रहे हैं, वही मॉडल आगे बरकरार रहेगा , इसपर लगातार मंथन जारी है

    Bihar Politics : बिहार में "नीतीश मॉडल " ही काम करेगा या आगे बदलेगा काम का तरीका ,क्यों छिड़ गई है बड़ी बहस  !

    बिहार में अभी एक तरह से "कार्य मॉडल" को लेकर   वैचारिक जंग छिड़ी हुई है.  बिहार में आगे नीतीश मॉडल काम करेगा या यह मॉडल बदलेगा या फिर गृह मंत्री सम्राट चौधरी जिस  मॉडल पर काम कर रहे हैं, वही मॉडल आगे बरकरार रहेगा.  यह सब सवाल किये जा रहे हैं.  फिलहाल बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी अभी खाली नहीं हुई है, लेकिन नए मुख्यमंत्री के लिए जमीन तैयार किया जा रहा है. चर्चाएं भी हो रही हैं.  सम्राट मॉडल की चर्चा भी चल रही है.  दरअसल, सम्राट चौधरी फिलहाल गृह मंत्री हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई जनसभा में इशारों -इशारों में उन्हें नए मुख्यमंत्री बता रहे हैं.   

    नीतीश मॉडल और सम्राट मॉडल को लेकर कई चर्चाएं 

    फिलहाल बिहार में नीतीश मॉडल और सम्राट मॉडल के बीच टकराहट भी शुरू हो गई है. जंगल राज बनाम मंगलराज की  भी चर्चा हो रही है.  कहा जा रहा है कि फिलहाल जो सम्राट मॉडल काम  कर रहा है, वही मॉडल आगे काम करेगा।  यानी भाजपा सरकार भी अपराधियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेगी।  यह बात सच है कि हाल के दिनों में बिहार के अपराधियों में खौफ  है.  अब वह या तो राज्य छोड़ दिए हैं या सरेंडर कर रहे हैं या उनका एनकाउंटर हो रहा है.  हालांकि जब से बिहार की राजनीति करवट लेनी शुरू हुई है, जदयू की तरफ से भी पलटवार शुरू हो गया है.  अन्य गठबंधन के लोग भी कुछ न कुछ बोल  रहे हैं. 

    सम्राट चौधरी के एक्शन  को कुछ लोग सम्राट मॉडल बता रहे हैं
     
    गृह मंत्री सम्राट चौधरी के एक्शन  को कुछ लोग सम्राट मॉडल बता रहे हैं, तो जदयू  वाले चाहते हैं कि बिहार में आगे जो भी काम हो, उसमें नीतीश कुमार की छाया दिखे।  नीतीश कुमार के क्राईम, करप्शन और कम्युनिज्म का पालन हो.  हर साल नौकरियों का पिटारा खुलता रहे.  नीतीश कुमार अब राज्यसभा सदस्य बनकर बिहार छोड़ रहे है.  केंद्र में उन्हें क्या जिम्मेवारी मिलेगी, यह  तो आने वाला वक्त बताएगा।  इस बीच उनके पुत्र निशांत कुमार जदयू ज्वाइन कर लिए हैं और वह सक्रिय भी हो गए हैं. 

    दो दशक में पहली बार नीतीश कुमार गाँधी मैदान नहीं पहुचें 

     पिछले दो दशक में पहली बार ऐसा मौका आया, जब गांधी मैदान ईद मिलन समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं पहुचें।  हालांकि सोशल मीडिया पर उन्होंने बधाई जरूर दी.  उनकी जगह पर उनके पुत्र निशांत कुमार पहुंचे और उसी  अंदाज में सक्रिय दिखे।  दरअसल जदयू में इस बात की चिंता है कि कार्य मॉडल बदला तो पार्टी को नुकसान  हो सकता है.  दूसरी ओर पार्टी की कमान नीतीश कुमार अपने पास ही रखना चाहते है.  शुक्रवार को पार्टी  के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नीतीश कुमार का नामांकन हुआ.  हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद मौजूद नहीं थे .  उनकी तरफ से नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष पद के लिए उनका नामांकन किया।  अगर वह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो चौथी बार जदयू का नेतृत्व करेंगे। जदयू के भीतर से भी एक आवाज़ उठ रही है कि पार्टी की कमान नीतीश कुमार के ही पास रहे.


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