झारखंड में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों की कुर्सी रहेगी या बदल जाएगी,दिल्ली में आज होगा फैसला,पढ़िए कौन कौन और क्यों किए गए हैं तलब!!


धनबाद: झारखंड में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों की कुर्सी का फैसला बुधवार को दिल्ली में हो सकता है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आवास पर आज बड़ी बैठक प्रस्तावित है. इस बैठक का मुख्य एजेंडा कांग्रेस के मंत्रियों के खिलाफ विधायकों की शिकायतों को रखा गया है.
इस बीच मंगलवार को झारखंड में निकाय चुनाव की भी घोषणा हो गई है .ऐसे में हो सकता है कि झारखंड में निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस अपना रुख झारखंड के नेताओं को बता सकती है .लेकिन दिल्ली से धनबाद पहुंची सूचना के मुताबिक झारखंड सरकार में कांग्रेस कोटे के वर्तमान के चारों मंत्री रहेंगे अथवा बदले जाएंगे, इस पर निर्णय ले लिया जाएगा.
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के पांच नाराज विधायक कई दिनों तक दिल्ली में डेरा जमाए हुए थे. और वहां आलाकमान से मंत्रियों की शिकायत की थी. कहा था कि मंत्री विधायकों की बात नहीं सुनते .जानकारी के अनुसार झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस कोटे के मंत्रियों को दिल्ली तलब किया गया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष, राहुल गांधी और संगठन प्रभारी उनके साथ बैठक करेंगे.
बैठक में पहुंचे मंत्रियों से पूछा जा सकता है कि आखिर उनके खिलाफ लगातार शिकायत क्यों की जा रही है. इस बैठक के लिए झारखंड के कांग्रेस प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, विधायक दल के नेता, उप नेता के साथ-साथ सांसदों को भी बुलाया गया है.
इधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी रांची लौट आए हैं. हो सकता है कि बैठक के पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी सरकार में शामिल कांग्रेस कोटे के मंत्रियों के बारे में भी बातचीत करें. यह अलग बात है कि झारखंड में कांग्रेस के कई विधायक नाराज चल रहे हैं .वह लगातार दिल्ली शिकायत कर रहे हैं .
मंत्रियों को बदलने की मांग कर रहे हैं. ऐसे में आज की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वैसे सूत्र यह भी बता रहे हैं कि कांग्रेस आलाकमान सभी राज्यों के कांग्रेस के पदाधिकारी के साथ बैठक कर रहे हैं. लेकिन आज की झारखंड के कांग्रेस नेताओं की बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण है .इधर यह भी सूचना है कि कांग्रेस कोटे के कुछ मंत्री पहले भी दिल्ली जाकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं.अब केंद्रीय नेतृत्व को फैसला लेना है.
रिपोर्ट धनबाद ब्यूरो
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