बारह फ़रवरी की हड़ताल से कोयला कंपनियों के उत्पादन -डिस्पैच पर क्यों लगेगा ब्रेक!


धनबाद(DHANBAD): एक तरफ कोयला कम्पनियाँ उत्पादन बढ़ाने के लिए जूझ रही हैं , तो दूसरी ओर 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है. इस हड़ताल से कोयला कंपनियों के उत्पादन और डिस्पैच पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. दावा किया गया है कि इस हड़ताल में 30 करोड़ मजदूर हिस्सा लेंगे। यह भी बताया गया है कि बीएमएस ने हड़ताल से अपने को अलग रखा है.
ट्रेड यूनियनों की मांग में चार मजदूर कोड्स निरस्त करना, निजीकरण की नीतियों पर रोक लगाना, ठेका प्रथा का विरोध और मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, बिजली संशोधन बिल 2025 को वापस लेना सहित अन्य मांगे शामिल हैं. बीएमएस को छोड़कर सभी संगठन इसमें शामिल हैं. कोयला खदानों का संचालन ठप हो सकता है. कोयला के उत्पादन और डिस्पैच पर सीधा असर पड़ सकता है. बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों की आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो सकती है. इस बीच बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने हड़ताल पर पुनर्विचार करने की अपील की है.
साथ ही कहा है कि किसी भी कर्मचारी को जबरन हड़ताल में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया जाए. सीएमडी ने कहा कि बीसीसीएल अपने कर्मियों के कल्याण ,सुरक्षा व विकास के लिए प्रतिबद्ध है और सभी संगठनों से सहयोग की अपेक्षा रखता है. खैर, इस हड़ताल से कोयला कंपनियों पर जबरदस्त मार पड़ सकती है. क्योंकि कोयला उत्पादन को लेकर कोल इंडिया पर बड़ा दबाव है. कोल इंडिया की सभी सहायक कंपनियां उत्पादन लक्ष्य से पीछे चल रही हैं.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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