बाबा की नगरी देवघर में क्यों नहीं होता है रावण दहन, जानिए वजह

    बाबा की नगरी देवघर में क्यों नहीं होता है रावण दहन, जानिए वजह

    देवघर(DEOGHAR):बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतिक के रुप में दशहरा का पर्व मनाया जाता है.यही वजह है कि देश के कोने-कोने सहित विदेशों में भी लोग दशहरा के अवसर पर बुराई के प्रतीक रावण का पुतला दहन कर खुशियां मनाते हैं और एक दूसरे को इस विजय पर विजयादशमी की शुभाकामनायें देते है, लेकिन अन्य जगहो की परंपरा से अलग हट कर देवघर में विजयादशमी के अवसर पर रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता है. 

    इस वजह से नहीं किया जाता है  दहन

    जानकारों की माने तो देवघर में रावण ने ही पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी.जिस वजह से देवघर को रावण की तपोभूमि माना जाता है और यहां स्थापित पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग को रावणेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है.जानकारो की माने तो रावण की पहचान दो रुपों में की जाती है एक तो राक्षसपति दशानन रावण के तौर पर और दूसरा वेद-पुराणो के ज्ञाता प्रचंड पंडित और विदवान रावण के रुप में.देवघर में रावण ने पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना करने की वजह से उसके दूसरे रुप की अधिक मान्यता है.रावणेश्वर महादेव की भूमि देवघर में दशहरा के अवसर पर रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता है.

    रावण के दो चरित्र है,एक सापेक्ष और दूसरा आपेक्ष

    लंकापति रावण के दस सिर थे.जिसे दो भाग में बांट दें तो एक भाग सापेक्ष होगा और दूसरा भाग आपेक्ष. सापेक्ष रावण को जानते हुए इसका दहन किया जाता है. रावण के सापेक्ष रूप में  काम,क्रोध,लोभ,मोह,घृणा, पक्षपात, द्वेष, घृणा, अहंकार ,धोका इत्यादि दैत्य प्रवृत्ति होने की वजह से यह ठीक है इसके इसी रूप को दहन किया जाता है. जबकी इसके दूसरे दैवीय प्रवृत्ति में धर्म ,ज्ञान, विवेक,संस्कार,आस्था इत्यादि होने की वजह से यह पूजनीय है. पंडित दुर्लभ मिश्र बताते हैं कि देवघर के लोगों का मानना है कि रावण की वजह से ही यहां महादेव आये है. रावण ने भगवान शिव से आत्मलिंग मांगा था. वही आत्मलिंग यहाँ सती के हृदय के साथ स्थापित हुआ है. देवघर वासी का रावण का यह ऋण से मुक्ति कभी नही मिलने की बात कही जा रही है. 

    रावण जैसा दूसरा कोई नहीं हो सकता-दुर्लभ मिश्र

    वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित पंडित दुर्लभ मिश्र बताते है कि रावण जैसा व्यक्तित्व का दूसरा नही हो है. दुर्लभ मिश्र के अनुसार जब राम लंका पर विजयी प्राप्त करने के लिए रामेश्वरम शिवलिंग की स्थापना करने जा रहे थे तो स्थापित नही हो रहा था. तब राम ने पार्थिव शिवलिंग को स्थापित करने के लिए रावण को बुलाया.प्रचंड पंडित होने के नाते रावण ने राम को संकल्प करवाया. संकल्प के दौरान रावण ने राम को लंका विजयी भवः का संकल्प करवाया था. यही वजह है कि देवघर में रावण के आपेक्ष रूप को देखते हुए बाबानगरी में रावण दहन नही किया जाता है.

    रिपोर्ट- रितुराज सिन्हा



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