बिहार-झारखंड के कांग्रेस प्रभारियों की साख क्यों दांव पर, बिहार क्यों भेजना पड़ा है भारी-भरकम टीम !

    बिहार-झारखंड के कांग्रेस प्रभारियों की साख क्यों दांव पर, बिहार क्यों भेजना पड़ा है भारी-भरकम टीम !

    धनबाद (DHANBAD) : बिहार और झारखंड के कांग्रेस  प्रभारियों  की साख दांव पर है. बिहार में तो चुनाव के ठीक पहले प्रभारी की जिम्मेवारी दूसरे को हैंडओवर कर दी गई है. अविनाश पांडे को बिहार भेजा गया है और वह "डैमेज कंट्रोल" में लगे हुए है.  इधर, यह भी सूचना आ रही है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी  वेणु गोपाल, अशोक गहलोत सहित अन्य लोग बिहार पहुंच गए हैं और "डैमेज कंट्रोल" में लगे हुए है. बता दें कि स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन भी बिहार पहुंच गए है. शनिवार को यह  नेता पटना पहुंचे हैं और देर रात तक बैठकों का दौरा जारी था.  इससे पहले प्रदेश प्रभारी के विरोध को देखते हुए पार्टी ने अविनाश पांडे को चुनाव समन्वय की जिम्मेवारी सौंप दी है. 

    बिहार प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू सदाकत आश्रम नहीं जा रहे

    कहा तो यह भी जा रहा है कि  टिकट बंटवारे के बाद हो रहे विरोध के चलते प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू सदाकत आश्रम नहीं जा रहे है. वहीं प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और विधान मंडल दल के नेता शकील अहमद खान चुनाव लड़ रहे है. कांग्रेस पार्टी नहीं चाहती है कि चुनाव के पहले कोई गतिरोध हो, शायद इसी वजह से "डैमेज कंट्रोल" के लिए दिल्ली से टीम भेजी गई है. यह टीम नेताओं के साथ कोआर्डिनेशन करने में जुटी हुई है. इसके पहले भी अशोक गहलोत पटना आए थे और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव को महा गठबंधन का सीएम  फेस घोषित किया गया था. इधर, झारखंड के कांग्रेस प्रभारी के राजू भी विवादों में घिर गए है. झारखंड में कांग्रेस के 25 जिला अध्यक्षों के चयन को लेकर हमले तेज हो गए है. 

    झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू से भी कार्यकर्ता कर रहे सवाल 
     
    झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू को जवाब देना पड़ रहा है. झारखंड के काम से कम 6 जिलों में विरोध तेज है.  ऐसे में यह सवाल उठता है कि जिस भरोसे के साथ झारखंड और बिहार में प्रभारी की नियुक्ति की गई, उसे भरोसे पर क्या कहीं कोई बड़ी चूक हो गई है. जिस वजह से चुनाव के ठीक पहले बिहार में हंगामा मचा हुआ है तो झारखंड में निकाय चुनाव के ठीक पहले विवाद तेज हो गया है. सवाल किया जा रहा है कि बिहार चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस को इतना बड़ा फैसला क्यों लेना पड़ा. बता दें कि टिकट को लेकर बिहार कांग्रेस में हुए घमासान और मजबूत सीटों के नुकसान के बाद कांग्रेस पार्टी को बड़ी और भारी भरकम टीम को बिहार भेजना पड़ा है. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो


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