बिहार में सीटों के बंटवारे का फार्मूला तय नहीं होने से झामुमो भी क्यों हुआ मायूस, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

    बिहार में सीटों के बंटवारे का फार्मूला तय नहीं होने से झामुमो भी क्यों हुआ मायूस, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

    धनबाद (DHANBAD) : दुर्गा पूजा भी खत्म हो गया, लेकिन बिहार में एनडीए और महागठबंधन में सीटों के बंटवारे का कोई तरीका अंतिम रूप नहीं ले सका है. झारखंड के लोग भी इंतजार कर रहे थे कि कम से कम दशहरा में सीटों के बंटवारे का फार्मूला तय हो जाएगा और उसके बाद उम्मीदवारों की घोषणा शुरू हो जाएगी. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. झारखंड की सबसे बड़ी पार्टी झामुमो भी इसी इंतजार में था कि बिहार में उसे कितनी सीट  मिलती है. उसी अनुसार तैयारी शुरू करे. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पिछले तीनों कहा था कि नवरात्र के दौरान एनडीए की सीटों पर बात बन जाएगी. वहीं, वीआईपी के सर्वे सर्वा मुकेश सहनी ने दशहरा में महागठबंधन में सीट बंटवारे का फाइनल रूपरेखा सामने आने की बात कही थी.  

    दशहरा खत्म हो गया लेकिन नहीं हुआ बंटवारा 

    दशहरा खत्म हो गया है लेकिन सीटों के बंटवारे की बात सामने नहीं आई है. इन नेताओं की बात अगर छोड़ भी दी जाए, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी अभी हाल ही में बिहार के दौरे पर आए थे. समस्तीपुर में उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में कहा था, कि दशहरे में या उसके तुरंत बाद एनडीए में सीटों का बंटवारा हो जाएगा. यहां यह बता देना जरूरी है कि एनडीए में भाजपा, जदयू, चिराग पासवान की पार्टी, जीतन राम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल है. महागठबंधन में भी इसी तरह की बातें कही गई थी. नवरात्र में या दशहरा में महागठबंधन में भी सीटों के बंटवारे की बात कही जा रही थी. महागठबंधन में भी कम खींचतान नहीं है. महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी  के अलावा तीन लेफ्ट पार्टिया भी शामिल है. साथ ही पशुपति पारस की पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी इसमें शामिल किया गया है. 

    बिहार में 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है

    बिहार में 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है. उम्मीद की जा रही है कि अगले सप्ताह किसी भी समय निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है. सूत्र बताते हैं कि चार या पांच अक्टूबर के बाद किसी भी समय चुनाव की तिथियां की घोषणा हो सकती है. इधर, चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति अलग-अलग ढंग से गरमा रही है. आरोप-प्रत्यारोप के दौर तो चल ही रहे हैं, सर्वे भी आने लगे है. सूत्र बताते हैं कि एनडीए के नेताओं पर ताबड़तोड़ भ्रष्टाचार के आरोप के बाद केंद्रीय नेतृत्व नए ढंग से मंथन करने में जुटा हुआ है. दूसरी ओर महागठबंधन में कांग्रेस ड्राइविंग सीट पर बैठने की कोशिश में है और इस वजह से सीएम फेस की बात फाइनल नहीं हो रही है. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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