क्यों पूछता है धनबाद -कहां छू मंतर हो गए रिफ्रैक्टिव उद्योग,क्यों है अर्थव्यवस्था बिगड़ने का खतरा!

    यह भी  कहा जा रहा है कि धनबाद कोयलांचल  की 52% अर्थव्यवस्था बीसीसीएल पर निर्भर है.

    क्यों पूछता है धनबाद -कहां छू मंतर हो गए रिफ्रैक्टिव उद्योग,क्यों है अर्थव्यवस्था बिगड़ने का खतरा!

    धनबाद(DHANBAD): जनसंख्या के मामले में धनबाद जमशेदपुर के बाद दूसरे स्थान पर आता है.  धनबाद की अर्थव्यवस्था कोयला आधारित उद्योगों पर निर्भर है.  कोयले के धंधे में जितनी चमक होगी, धनबाद की आर्थिक व्यवस्था उतनी ही चमकेगी।  लेकिन धनबाद कोयलांचल में कोयला आधारित उद्योग एक-एक कर बंद होते जा रहे हैं, जो चल रहे हैं, उनकी भी आर्थिक दशा अच्छी नहीं है.  एक समय धनबाद रिफ्रैक्टिव उद्योग का "बादशाह" था.  लेकिन आज एक भी देखने को नहीं मिलेंगे।  यही हाल हार्ड  उद्योगों का भी था.  राजगंज  से लेकर बंगाल बॉर्डर तक जीटी रोड के दोनों किनारे हार्ड कोक  उद्योगों की चिमनियां  धुआं उगलती थी.  लेकिन वह भी धीरे-धीरे मद्धिम  पड़ गई हैं. 

    बीसीसीएल यानी कोयले पर ही निर्भर है धनबाद की  अर्थव्यवस्था

     यह भी  कहा जा रहा है कि धनबाद कोयलांचल  की 52% अर्थव्यवस्था बीसीसीएल पर निर्भर है.  यह  बात भी  सच  है ,बीसीसीएल के उत्थान के साथ धनबाद की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.  बीसीसीएल जितना चमकती  है, धनबाद भी उतना ही चमकता है.  यह  अलग बात है कि कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद से ही धनबाद कोयलांचल में एक अलग किस्म की स्थिति पैदा हुई.  माफियागिरी शुरू हो गई, कोयला उत्खनन कर बालू की भराई  पर्याप्त मात्रा में नहीं की गई.  नतीजा है कि आज जमीन धंस रही है, लोग मर रहे हैं.  माफियागिरी उस समय भी था, लेकिन तरीका अलग था.  

    एक समय तो केवल पांच माफिया थे लेकिन आज

    उस समय माफिया के नाम पर "पांच देवों" की गिनती होती थी.  लेकिन अब धीरे-धीरे माफिया का यह गैंग टुकड़ों में बंट  गया है.  पुराने माफिया तो नहीं रहे, लेकिन उनके "यूथ विंग" अभी भी सक्रिय हैं.  यह  अलग बात है कि अलग-अलग गिरोह भी तैयार हो गए और पहले के माफिया जहां कोलियरी पर कब्जा के लिए लड़ते थे, अब के माफिया आउटसोर्सिंग कंपनियों पर कब्जे की लड़ाई लड़ते  है. 

    अब तो लोडिंग पॉइंट और अवैध उत्खनन स्पॉट के लिए होती है मारामारी 
     
    लोडिंग पॉइंट पर कब्जे की लड़ाई करते हैं और कत्ल करते और करवाते हैं.  लेकिन इन सब से उद्योगों का हाल बिगड़ गया है.  कोयला चोरी कुटीर उद्योग का रूप ले लिया है.  कोयला चोरी करने वाले लोगों की पीठ पर बड़े-बड़े लोगों का हाथ होता है.  अब तो बीसीसीएल के सबसे बड़े अधिकारी सार्वजनिक मंच से स्वीकार करते हैं कि कोयला चोरी धनबाद के लिए खतरनाक है.  खैर यह  तो है वर्तमान की स्थिति, लेकिन धनबाद जब बिहार में था, तो भी उद्योग के मामले में उसकी दुर्गति थी और आज झारखंड में आ गया, तो भी उद्योग के मामले में धनबाद की दुर्गति है. 

    बड़ा सवाल -25 साल  के झारखंड में धनबाद कोयलांचल को क्या मिला --?
     
    झारखंड अब 25 साल का हो गया है.  युवा झारखंड में भी धनबाद को बहुत कुछ लाभ मिलता नहीं दिख रहा है.  धनबाद की हकमरी हो रही  है. ऐसी बात नहीं है कि धनबाद में संस्थान नहीं हैं.  धनबाद में तो देश के  विख्यात और इकलौते संस्थान तक हैं, बावजूद धनबाद को केंद्र में रखकर जो काम करने चाहिए थे, वह नहीं हुए.  नतीजा है कि आगे धनबाद का क्या होगा, यह कहना मुश्किल है.  यह  बात भी सच है कि देश की सबसे बड़ी पुनर्वास  योजना की शुरुआत धनबाद में की गई.  संशोधित पुनर्वास  योजना को भी मंजूरी दी गई, लेकिन विस्थापन की समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया।  सवाल उठता है कि धनबाद और कितना आंसू बहाएगा?

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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